भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

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पृष्ठ 175

- it'sहुwith a loop,प्रातर्हुते. Then ऽग्निहोत्रे. Then पृष्ट्याग्ँ(withग्ँ). Then स्तीर्त्वापः. Then प्रणीय. Then निर्वपत्याग्ने-. At the end of line 5: (the line number 5!). Yes,is the line number! Line 10 has१०. Line 15 has १५`.

*   Now let's examine lines 6 to 19 very carefully:

*   Line 6:
    `यमष्टाकपालमिति पञ्च संचराण्यैन्द्राग्नं द्वादशकपालं वैश्वदेवं`
    - `यमष्टाकपालमिति`
    - `पञ्च`
    - `संचराण्यैन्द्राग्नं`
    - `द्वादशकपालं`
    - `वैश्वदेवं`
    All perfectly clear!

*   Line 7:
    `चरुमिन्द्राय शुनासीराय पुरोडाशं द्वादशकपालं वायव्यं पयः`
    - `चरुमिन्द्राय`
    - `शुनासीराय`
    - `पुरोडाशं`
    - `द्वादशकपालं`
    - `वायव्यं`