बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
पृष्ठ 206, कुल 774 में से
संदर्भ में पढ़ेंविर्धानाभ्यां प्रवर्त्यमानाभ्यामनुब्रूहीति त्रिरुक्तायां प्रवर्तयन्ति प्राची प्रेतमध्वरं कल्पयन्ती ऊर्ध्वं यज्ञं नयतं मा जीह्वरन्नित्यथ यद्यच्चोत्सर्जति..." ??
Wait! Look at the glyphs:
य
द्य
च
Wait, is it यद्य च?
Wait, could it be यद्य and च्च? No, य च्च उ त्स र् ज ति!
Wait, look at the image at Line 10:
१० जीह्वरन्मित्य॑थ यच्च उत्सर्जति
Wait, look at यच्च:
Is it यच्च?
Let's compare यच्च with यच्च in Sanskrit: "यत् च" -> "यच्च".
"अथ यच्च उत्सर्जति" = "And whatever he emits/releases..." (i.e. if he releases speech/breath/sound!).
Wait! "यद् वाचं विसर्जति" -> but here: "यच्च उत्सर्जति" or "यद्युत्सर्जति"?
Wait, does it say यद्युत्सर्जति?
Wait! Look at the