भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

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हुत्याभिजुहोति" (thus having interposed this barhis, he offers an oblation with the sruva: "पितृभ्यः स्वाहेति" - To the fathers, svāhā!). This is so clear and perfectly matches the ritual sequence:

  1. Put barhis in the hole: "पितॄणाँ सदनमसि"
  2. अथैनद्बर्हिषमन्तर्धाय स्रुवाहुत्याभिजुहोति "पितृभ्यः स्वाहा" इति!
  3. अथैनामुच्छ्रयति (then he raises the post): "उद्दिवँ स्तभानान्तरिक्षं पृण पृथिवीं दृँह" इति!
  4. अथैनां प्राचीनकर्णां मिनोति (then he sets it up with its ears facing east): "द्युतानस्त्वा मारुतो मिनोतु मित्रावरुणयोर्ध्रुवेण धर्मणा" इति!
  5. अथैनां प्रदक्षिणं पुरीषेण पर्यूूहति (then he heaps loose earth around it clockwise): "ब्रह्मवनिं त्वा क्षत्रवनिँ सुप्रजावनिँ रायस्पोषवनिं पर्यूहामीति"!

Everything makes total sense now. Wait, let's re-read line 4 carefully: मित्रावरुणयोर्ध्रुवेण धर्मणेत्यथैना प्रदक्षणं पुरीषेण पर्यूूहति Wait, is it धर्मणेत्यथैना or `धर्मणेत्यथ