बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंात्याक्रम्याश्राव्याह Wait! Look at "गृात्याक्रम्याश्राव्याह": Wait, look at the word: 'गृ', then 'ही' or 'ह्णी'? Let's look at L7: सौम्यमागच्छत्यथ शुचि चतुर्गृहीतं गृहीत्वात्याक्रम्याश्राव्याह`
Wait, look at "गृहीत्वात्याक्रम्याश्राव्याह":
Letters:
गृ (gr)
ह्णी (hṇī) or ही (hī)?
Look at: ह with a loop below, then व (त्वा): "गृहीत्वात्याक्रम्याश्राव्याह"?
Wait, look at the ligature: गृ - ह् - ी - त्वा?
Wait, it's 'ह' + 'ल' + 'त्वा'? No, 'ह' + 'ी' + 'त्वा' = गृहीत्वा!
Wait, look at the syllable between 'गृ' and 'त्वा':
It is 'ह' with long 'ी' matra! Yes, "गृहीत्वात्याक्रम्याश्राव्याह"!
Let's check the letters:
गृ - ही - त्वा - त्या - क्र - म्या - श्रा - व्या - ह
Wait, "गृहीत्वात्याक्रम्याश्राव्याह" or "गृहीत्वा त्याक्रम्याश्राव्याह"? It's one continuous word: "गृहीत्वा