भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

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नुजानात्यथ निर्वपति" In Baudhayana Srautasutra, the chapter begins: Wait, is it: निर्वप्स्यन् ? Wait! निर्वप्स्यन्? Let's look at the word: निर्वप्स्यन् -> नि र्‍व त्स्य न्? Wait, does it have an anusvara? Wait, if it is निर्वप्स्यन् निर्वपेति यजमानो ऽनुजानात्यथ निर्वपति: Wait! "निर्वप्स्यन् 'निर्वपे'ति यजमानो ऽनुजानाति"! WAIT! Does the Adhvaryu say anything, or is it: "निर्वप्स्यन् 'निर्वपेति' यजमानो ऽनुजानाति"? No, the Yajamana permits him when he is about to pour out: "निर्वप्स्यन्तं निर्वपेति यजमानो ऽनुजानाति" (accusative) or "निर्वप्स्यन् [पृच्छति]..."? WAIT! Look at the image! नि र्‍व त्स्य न्? Wait, look at the end of the word: Does it have a virama under न? Look closely: `नि - र्व - प - त्स्य

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