बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished774 पृष्ठ
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(15).
Line 16: "पत्यामृषभं लोकंपृणा॑ उदीचाच लोकंपृणया प्रसौत्य॑ग्नि-"
- लोकंपृणा॑ : accent over णा
- प्रसौत्य॑ग्नि- : accent over त्य
Line 17: "मुदीचीभिः संप्रच्छादयन्ति॑ संप्रच्छन्नं पलाशशाखया परि-"
- संप्रच्छादयन्ति॑ : accent over न्ति
Line 18: "कर्षति लोकं पृण छिद्रं पृणेत्य॑थ चितिकृप्त्याभिमृशति चित्ति-"
- पृणेत्य॑थ : accent over त्य
Now let's check the footnotes at the bottom: Line 19: "१ Thus (०पातिनीꣳ) MBU Bhav. (one MS.); पातीनीꣳ Be; " Line 20: "०पादिनीꣳ Tr H Bhav. (another MS.), Keś. (twice), Ms. (but Msc. :" Line 21: "हंसपतनवत् चक्रया गत्या आधायाः, and यथा भवेयुर्हंसपातिन्य इति गोपाळः) ।"
Wait, look at line 20: "Keś. (twice), Ms. (but Msc. :" Look at "चक्रया" or "वक्रया": ह