भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

पृष्ठ 541, कुल 774 में से

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ब्रह्मञ्ज्यतामस्मै संजानते ऽथैनान्त्संशास्ति सकृत्सकृत्प्राश्याप्रत्यव- मृशन्तो धारयाध्वा इत्येतस्मिन्त्सर्पिरासेचने रग्ने संतर्प्य परिकर्मिणे प्रयच्छति ⁠। द्विरपरं प्राश्य पाꣳसूंत्स राङ्कवे ब्रह्मोदन इति १ ⁠। तेभ्यश्चतुरः साहस्रान्निष्कान्ददाति सुवर्ण- रजतौ च रुक्मावेव च ये चत्रस्याभिषेक्तारस्ते ऽध्वर्युमभिषिञ्चन्ति ⁠। ५ स आह ब्राह्मणाश्च राजानश्चाध्वर्युरेतौ द्वौ संवत्सरौ राजा भविष्यति तस्य शुश्रूषध्वं यो हास्य २ न शुश्रूषिष्यते सर्वस्वं तं ३ ज्यास्यन्तीत्याध्वर्युरेतौ द्वौ संवत्सरौ राजा भवति ⁠। यजमान इतीतरमाचक्षते ⁠। स आह ब्रह्मन्नश्वं मेध्यं सन्त्स्यामि देवेभ्यः प्रजापतये तेन राध्यासमिति ⁠। बधानेतीतरः प्रत्याह देवेभ्यः १० [L

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