भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

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! It is चतुष्टयीरपः! Wow, fantastic! चतुष्टयीरपः समवनीयाभिषिञ्चति ॥ १६ ॥and the margin has५`.

Line 7: या दिव्या आपः पयसा संबभूवुर्या अन्तरिक्ष उत पार्थि- Line 8: वीर्याः । तासां त्वा सर्वासाग्ँ रुचाभिषिञ्चामि वर्चसा ॥ अभि Line 9: त्वा वर्चसासिचं दिव्येन पयसा सह । यथासा राष्ट्रवर्धनस्तथा Line 10: त्वा सविता करत् ॥ इन्द्रं विश्वा अवीवृधन्समुद्रव्यचसं गिरः । Line 11: रथीतमग्ँ रथीनां वाजानां सत्पतिं पतिम् ॥ वसवस्त्वा पुर- १० Line 12: स्तादभिषिञ्चन्तु गायत्रेण छन्दसेति पुरस्तादैता एव तिस्रो Wait, look at line 12: पुरस्तादैता or पुरस्तादेता? Let's look at पुरस्तादेता: Is it दे or दै? Look at line 12: पुरस्तादेता! It has ONE slant ! Wait, look at line 14: `दक्षिणत॑ एता एव तिस्रो ऽनुद्रुत्यादित्यास्त्वा