भारतकोश
बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary

आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished774 पृष्ठ

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ेवास्य / अन्नाद्येवास्य). And in line 16: "कामयेतान्नाद्यो मे" - wait, could it be "कामयेतान्नाद्यो"? Or "कामयेतान्नाद्या मे"? Wait, look at the letter: is that a top stroke or an anusvara or a smudge? Wait, look at "अन्नाद्यो" in line 16: Between 'द्य' and 'मे': It has a vertical bar (ा) and a slant at the top (े), which together make 'ो'. So it is printed as "कामयेतान्नाद्यो"!

Let's check line 7: "त्तस्यावरुद्ध्यै इति तदर्थं यच्चिवेदा१ भवति न ह्येतामेकवेदा" Footnote 1: "१ चिवेदो M." So line 7 has "यच्चिवेदा१ भवति".

Let's check line 11: "दक्षिणानां काले ब्रह्मणे उपातिदिशन्ति ⁠।⁠ तं ब्रह्मणः सन्तं२ १०" Footnote 2: "२ Thus corrected according to the Karmānta; समंतं all the MSS."

Let's check line 12: "पर्युपविश्य भक्षयन्ति यद्धुतं मन्यन्ते तेन ⁠।⁠ यद्घृतं भक्षयन्ति" "यद्धुतं" - यत् + हु

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