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बौधायन शुल्बसूत्रम् (आचार्य बौधायन - प्राचीन वैदिक रेखागणित, ज्यामिति एवं वेदी-निर्माण सटीक)

Baudhayana Shulbasutram with Commentary by Vibhutibhushan Bhattacharya

आचार्य बौधायन (सम्पादक: विभूतिभूषण भट्टाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished366 पृष्ठ

पू० द० प० चित्र ३१ । ( २।३४ सूत्रे चतुरश्रगार्हपत्ये २यः प्रस्तारः )

यस्मिन् पृष्ठे कोऽपि देवनागरीपाठः (सूत्राणि, भाष्यं वा) नास्ति। इदं रिक्तं पृष्ठम् अस्ति।

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पू० उ० द० प० चित्र ३२ । ( २।३५ सूत्रे परिमण्डलगार्हपत्ये १मः प्रस्तारः । )

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चित्र ३३ । ( २।३६ सूत्रे परिमण्डलगाईपत्ये २यः प्रस्तारः )

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चित्र ३५ । ( २।३८ सूत्रे आग्नीध्रीयं परिमण्डलम् )

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चित्र ३६ । ( २।३९ सूत्रे होतृधिष्ण्यं चतुरस्रम् )

४. चतुर्थ अध्याय: रथचक्रचिति, द्रोणचिति, प्रउगचिति, कङ्कचिति एवं शुल्ब उपसंहार

... ) । (२।३६ सू...

) ( २।३६ सूत्रे होतुर्धिष्ण्यं परिमण्डलम् ) अत्र सर्वाः विभाजिकाः रेखाः केन्द्रगामिन्यः । ( मध्यस्थं वृत्तं भ्रमाङ्कि

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(पृष्ठेऽस्मिन् मूलग्रन्थस्य कोऽपि पाठो नास्ति / This page is blank)

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पू. प. चित्र ३८ । ( २।४० सूत्रे प्रशास्तृप्रभृति पञ्चधिष्ण्यं चतुरस्रम् )

... ३१ । (२४०

... ३६ । ( २४० सूत्रे प्रशास्तृप्रभृतिधिष्ण्यं परिमण्डलम् ) मध्यस्थं वृत्तं भ्रमाल्लिखितम् । सर्वाः रेखाः केन्द्रगामिन्यः

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पू० द० प० चित्र ४० । ( २।४१ सूत्रे चतुरस्रं मार्जालीयम् )

३०

[पू०]

[उ०] [द०]

[प०]

चित्र ४१ । ( १४१ सूत्रे मार्जालीयं परिमण्डलम् ) मध्यस्थं वृत्तं भ्रमोल्लिखितं सर्वाः रेखाः केन्द्रगामिन्यः ।

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