बौधायन शुल्बसूत्रम् (आचार्य बौधायन - प्राचीन वैदिक रेखागणित, ज्यामिति एवं वेदी-निर्माण सटीक)
Baudhayana Shulbasutram with Commentary by Vibhutibhushan Bhattacharya
आचार्य बौधायन (सम्पादक: विभूतिभूषण भट्टाचार्य) द्वारा
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पू० उ० द० प० चित्र ३२ । ( २।३५ सूत्रे परिमण्डलगार्हपत्ये १मः प्रस्तारः । )
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चित्र ३३ । ( २।३६ सूत्रे परिमण्डलगाईपत्ये २यः प्रस्तारः )
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चित्र ३५ । ( २।३८ सूत्रे आग्नीध्रीयं परिमण्डलम् )
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चित्र ३६ । ( २।३९ सूत्रे होतृधिष्ण्यं चतुरस्रम् )
४. चतुर्थ अध्याय: रथचक्रचिति, द्रोणचिति, प्रउगचिति, कङ्कचिति एवं शुल्ब उपसंहार
... ) । (२।३६ सू...
) ( २।३६ सूत्रे होतुर्धिष्ण्यं परिमण्डलम् ) अत्र सर्वाः विभाजिकाः रेखाः केन्द्रगामिन्यः । ( मध्यस्थं वृत्तं भ्रमाङ्कि
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पू. प. चित्र ३८ । ( २।४० सूत्रे प्रशास्तृप्रभृति पञ्चधिष्ण्यं चतुरस्रम् )
... ३१ । (२४०
... ३६ । ( २४० सूत्रे प्रशास्तृप्रभृतिधिष्ण्यं परिमण्डलम् ) मध्यस्थं वृत्तं भ्रमाल्लिखितम् । सर्वाः रेखाः केन्द्रगामिन्यः
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पू० द० प० चित्र ४० । ( २।४१ सूत्रे चतुरस्रं मार्जालीयम् )
३०
[पू०]
[उ०] [द०]
[प०]
चित्र ४१ । ( १४१ सूत्रे मार्जालीयं परिमण्डलम् ) मध्यस्थं वृत्तं भ्रमोल्लिखितं सर्वाः रेखाः केन्द्रगामिन्यः ।
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पू० द० प० चित्र ४२ (सू. २४१) मार्जालीयम् ( ? )