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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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98 साहिब बन्दगी

(42) साहिब जी को पत्थर पीसने वाली चक्की में खड़ा किया जाना

ईर्ष्या से शेख तकी जल रहा था। वो साहिब को मार कर सदा-सदा के लिए अपने रास्ते से हटाना चाहता था। साहिब की बढ़ती हुई प्रसिद्धी को समास करने के लिए वह जितने उपाय करता था, उसका असर उल्टा ही होता था। वह तो एक प्रचारक की तरह साहिब की प्रसिद्धी को दूर-दूर तक फैला रहा था। जो भी कसनियों की बात सुनता और साहिब के कौतक को सुनता वो ही साहिब का भक्त बन जाता। इससे तकी का क्रोध और बढ़ता जाता। वो फिर कोई षडयंत्र रचता था। एक दिन उसने पत्थर पीसने वाली मशीन को देखा तो विचार किया कि क्यों न कबीर को इस मशीन में डाला जाए, जिससे कबीर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएँ। समय पाकर एक दिन तकी साहिब को उस चक्की के पास ले गया। साहिब तो अंतर्यामी थे। वे सब जानते हुए भी उसे छूट दे रहे थे, क्योंकि वो तो प्रचारक की तरह लगा हुआ था। शेख तकी ने सिपाहियों को हुक्म दिया कि कबीर को इस चक्की में डाल दो। हुक्म का पालन हुआ और साहिब ने भी कोई विरोध नहीं किया। चक्की चल रही थी। तकी ने सोचा कि आज साहिब से छुटकारा मिल जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ। साहिब का तो कुछ भी नहीं बिगड़ा। शब्द स्वरूपी होने के कारण साहिब पर कोई असर न हुआ।

पत्थर पिसती चक्की में साहिब को दिया डाल।
चलती चक्की साहिब का, कुछ न सकी बिगाड़॥