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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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पृष्ठ 106

104 साहिब बन्दगी

#(45) चक्र से साहिब जी पर प्रहार किया जाना

समय पाकर सहयोगी पाखण्डियों ने सलाह दी कि क्यों न कबीर पर ऐसे चक्र का प्रहार करें, जैसा श्री कृष्ण के पास था। उसने बताया कि कृष्ण जी के चक्र से कोई भी बचकर नहीं जा सकता था। वो चक्र किसी भी विरोधी को मारकर फिर वापिस उनके पास आ जाता था। तकी को यह बात बहुत अच्छी लगी। उसे फिर उम्मीद की एक किरण नज़र आने लगी। उसने ऐसा ही चक्र बनवाया और चक्र चलाने में कुशल चालक को भी बुलवाया। चालक को तकी ने कह दिया कि जब मैं इशारा करूँ, तब ही यह चक्र कबीर पर चलाना है। शेख तकी ने समझा दिया कि कबीर की गर्दन को इस चक्र से अलग करना है। चक्र चालक ने कहा कि आप चिंता न करें, जैसा आप कहे वैसा ही होगा। शेख तकी ने कहा यदि तुम ऐसा कर सके तो तुम्हें बहुत सारा ईनाम मिलेगा। समय आने पर तकी ने चालक को ईशारा किया। ईशारा पाते ही चालक ने चक्र को कबीर पर छोड़ा। सभा में सबने देखा कि चक्र साहिब का चक्कर काटकर वापिस मुड़ा और चलाने वाले का सिर अलग कर दिया। यह देख सब साहिब की जय-जयकार करने लगे। तब बाद में साहिब ने उस चालक को जीवित कर दिया। वो साहिब के चरणों पर गिरकर क्षमा माँगने लगा। दयालु साहिब तो शेख तकी को भी क्षमा किये जा रहे थे, फिर चक्र चालक का कसूर ही कितना था। साहिब जी ने पीर शेख तकी और चालक दोनों को क्षमा कर दिया।

चक्र चलाने में माहिर, चालक एक ले आया।
भरी सभा में साहिब ऊपर, चालक चक्र चलाया॥
चारों ओर चक्र घूमा, रत्ती छू न पाया।
चालक का ही सिर कट गया, जब चक्र वापस आया॥