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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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106 साहिब बन्दगी

(46) साहिब जी पर बाना चालक पहलवान द्वारा प्रहार करवाना

रोज-रोज साहिब की बढ़ती हुई ख्याति से परेशान होकर एक दिन विरोधियों ने शेख तकी को सलाह दी कि कबीर के ऊपर बाना चालक पहलवान द्वारा प्रहार करवाकर मरवाया जाए। मुसलमानों में ऐसे पट्टा खेलने वाले पहलवान होते हैं। ये पट्टा खेलते हुए बड़े खेल दिखाते हैं। कहा जाता है कि यदि किसी को पट्टा या बाना लग जाए तो वो वहीं मर जाता है। इसी कारण इस खेल को देखने वाले थोड़ा दूर रहकर देखते हैं। शेख तकी ने बाना चलाने वाले पहलवान को बुलवाकर अच्छी तरह से समझाया कि यह खेल दिखाते हुए मेरे इशारे का इंतज़ार करना। जब मैं इशारा करूँ, तुम कबीर पर अपने बाने का प्रहार करना। धर्म गुरु ने उसे बहुत सारे ईनाम का लालच भी दिया। बाना चालक बड़ा खुश हुआ और भरी सभा में पहुँच गया। भरी सभा में जब साहिब सत्य भक्ति का संदेश दे रहे थे तो बाना चालक ने वहाँ अपना खेल दिखाना शुरू कर दिया। बाना चालक का बाना तो साहिब के शरीर को छू भी नहीं पा रहा था।

भारी लालच दे पाखण्डियां, चालक को सब समझाया। पा ईशारा पहलवां, बाना साहिब पर बरसाया॥ बाना साहिब को छू न पाए, बड़ा जोर लगाया॥

अंत में पहलवान लगातार साहिब पर प्रहार करने लगा। लोग देख रहे थे कि बाने ने चालक के सिर पर ही प्रहार कर दिया, जिससे पहलवान के सिर के टुकड़े-टुकड़े हो गये। यह दृश्य देख सब साहिब की जय-जयकार करने लगे। साहिब ने एक बार फिर अपनी दयालुता का परिचय देते हुए बाना चालक को पुनः जीवित कर दिया। यह देखकर शेख तकी और उसके पाखण्डी साथी बहुत लज्जित हुए।

बाने उलटा चालक का सिर, टुकड़-टुकड़ कर डाला। दयालू साहिब ने चालक को, पुनः जीवन दे डाला॥