बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
पृष्ठ 116, कुल 122 में से
संदर्भ में पढ़ें114 साहिब बन्दगी
(50) साहिब जी को तेल के कोल्हू में डलवाना
शेख तकी द्वारा बार-बार साहिब की कसनी लेने से बादशाह बहुत दुःखी था क्योंकि बादशाह सिकंदर साहिब को स्वयं खुदा मानता था। बादशाह की साहिब के प्रति श्रद्धा को देख, धर्म गुरु शेख तकी ईर्ष्या में इतना जल रहा था कि उसे साहिब को मारने के सिवाय और कुछ सूझता ही नहीं था। इसलिए वो आए दिन अपने साथियों से मिलकर साहिब को मारने के नये-नये ढंग सोचता रहता। एक दिन वो अपने साथियों के साथ कहीं जा रहा था तो रास्ते में तेल का कोल्हू चलते देखा। सबका ध्यान उस ओर गया। बस ! फिर क्या था, सबने विचार रखा कि कबीर को मारने के लिए यह तरीका भी अपनाकर देख लेते हैं। हो सकता है कि इस युक्ति से कबीर का अंत हो जाए। शेख तकी को भी यह सलाह ठीक लगी। वो एक दिन साहिब को घूमने के बहाने ले गया। अर्न्तयामी साहिब तो सब जानते थे। शेख तकी ने उस तेल के कोल्हू के पास पहुँचकर साहिब से कहा कि आप इस ओखली में खड़े हो जाओ। साहिब भी आदेश के ही इंतज़ार में थे। वो तो मुस्कराते हुये उसमें खड़े हो गये। तभी शेख तकी ने कोल्हू चलाने वाले को कोल्हू चलाने का हुक्म दिया। हुक्म सुनते ही कोल्हू वाले ने कोल्हू चला दिया। कोल्हू चलता रहा, साहिब खड़े मुस्कराते रहे। कोहलू साहिब का कुछ न बिगाड़ पाया। यह देख तकी और उसके साथी बड़े हैरान हुये और अपनी हार से बेइज्जत होकर वहाँ से चल दिये।
कोल्हू में साहिब को पीड़ो, सबने मिल विचार बनाया। ओखली में खड़े होने का, साहिब को हुक्म सुनाया॥ झट से सब ने किया ईशारा, कोल्हू वाले कोल्हू चलाया। चलता कोल्हू साहिब ऊपर, कुछ बिगाड़ न पाया॥