भारतकोश
बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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बावन कसनी ( कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई ) 13

त्रेतायुग–इस युग में ज्ञानी जी ( कबीर साहिब) मुनिन्द्र नाम से आए। इस युग में मनुष्य 14 हाथ ऊँचे शरीर के थे। त्रेतायुग के हंस ऋषि श्रृंगी ( नेम ऋषि) , अयोध्व मधुकर, टकसार।, लक्ष्मण कुमारा, रावण की पत्नि मन्दोदरी, गुरु वशिष्ठ मुनि और दुर्वासा ऋषि को गुरु स्वरूप परवाना दिया।

पुनि त्रेता युग कहौं विचारी। सात हंस त्रेतायुग तारी॥
प्रथम ऋषि श्रृंगी समझाये। दुसरे अयोध्या मधुकर आये॥
तीसरे शब्द कह्यो टकसार। चौथे बोधे लछन कुमारा॥
पचवें चलि रावण लगि गयऊ। तहाँ भेंट मंदोदरि से भयऊ॥
गवीं रावण शब्द न माना। मंदोदरी शब्द पहचाना॥
छठैं चलि वसिष्ठ लगि आये। ब्रह्म निरूपन उनहिं सुनाये॥
सतये जंगल में कियो वासा। जहाँ मिले ऋषि दुर्वासा॥
सात हंस सातौ गुरु कीन्हा। परम तत्व उनही भल चीन्हा॥
सातौ गुरु त्रेता में भयऊ। देइ उपदेश सो हंस पठयऊ॥

इस तरह साहिब कह रहे हैं कि त्रेतायुग में मैंने सात हंसों को तारा, जिनमें वशिष्ठ मुनि, श्रृंगी ऋषि आदि भी थे। अब द्वापर युग का वर्णन करते हुए साहिब कह रहे हैं-

द्वापरयुग–इस युग में ज्ञानी पुरुष करुणामय नाम से साहिब आए और रानी इन्दुमती, राजा युधिष्ठिर, द्रौपदी, पराशर ऋषि, राय धुधुल, पारसदास और उनकी पत्नी, गरुड़बोध, हरिदास सुपच भक्त, शुकदेव, विदुर, राजा भोज, राजा मुचकुन्दहि, चन्द्रहास, चार ग्वाल ( श्री कृष्ण) की गोपी को तारा।

त्रेता गत द्वापर युग आया। सत्रह जीव परवाना पाया॥
प्रथमं में राय चंद विजय कहँ गयऊ। ताकी रानी इन्दुमति रहेऊ॥
दुसरे राय युधिष्ठिर कहँ आये। द्रौपदी सहित परवाना पाये॥
तिसरे पाराशर पहँ आये। निर्णय ज्ञान ताहि समझाये॥
चौथे राय धुधुल लहि भेदा। बहुत ज्ञान को कीन्ह निखेदा॥
पचयें पारसदास समझावा। स्त्री सहित परवाना पावा॥
छठये गरुड़बोध हम कीन्हा। विहंग शब्द गरुड़ को दीन्हा॥
सातें हरिदास सुपच समझावा। नीमषार महँ उसको पावा॥