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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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32 साहिब बन्दगी

(9) सोते हुए साहिब जी को तलवारों से मरवाया जाना

शेख तकी और उनके साथियों में क्रोध की आग दिनों-दिन बढ़ती जा रही थी। उसकी कोई भी तरकीब कामयाब नहीं हो रही थी। उसने सोचा कि शायद कबीर कोई जादू जानता है, इसलिए मेरी कोई भी तरकीब कामयाब नहीं हो रही है। तो उसने अब की बार एक नयी तरकीब साहिब को रास्ते से हटाने की बनाई और सोचा कि मैं कबीर को सोते हुए ही मरवा दूँ ताकि उसे कोई जादू करने का मौका भी न मिल सके। यह सोच उसने उसी रात अपने जल्लादों को बुलवाकर हुक्म दिया कि कबीर को सुप्त अवस्था में क़त्ल करना है। उसके शरीर के इतने टुकड़े करो कि कोई भी जादू उसे बचा न सके। जल्लाद उस स्थान पर पहुँचे जहाँ साहिब सो रहे थे। जल्लादों ने मिलकर साहिब के गले पर अपनी तलवारों से बहुत प्रहार किये, पर साहिब का कुछ भी नहीं बिगाड़ पाए। वो नहीं जानते थे कि साहिब का तो शरीर ही नहीं है; शरीर तो केवल संसार के लोगों के देखने मात्र के लिए ही धारण किया है। तलवार चलाते-चलाते जल्लादों ने सोचा कि साहिब को तलवार से काटना तो हवा को काटना ही है, इसलिये जल्लाद लज्जित होकर वापस चले गए।

सोय पड़े कबीर पर, जल्लादों चलाई तलवार।
शब्द स्वरूपी देही पर, पड़ा न कोई घाव॥
साहिब पुरुष कबीर ने, देह धरी न कोय।
घट घट में जो रम रहा, शब्द स्वरूपी सोय॥