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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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34 साहिब बन्दगी

#(10) साहिब जी को कुँए में डालकर मरवाया जाना

साहिब को साथ ले, बादशाह सिकंदर अपने सैनिकों के साथ दिल्ली वापिस आ गये। ऐसे में धर्म गुरु पीर शेख तकी की ईर्ष्या भी बहुत बढ़ गयी थी। उसने फिर साहिब को मारने के लिए खाली कुँए में साहिब को दबा देने का षड्यंत्र रचा। शेख तकी ने साहिब को एक कुँए के पास ले जाकर कहा कि आप इस कुँए में प्रवेश करें, हम आपकी प्रभुताई देखना चाहते हैं। साहिब ने उसकी बात को स्वीकार करते हुए कुँए में बिना किसी झिझक के प्रवेश कर लिया। शेख तकी ने अपने षड्यंत्र अनुसार मजदूरों को तुरंत पत्थर, मिट्टी आदि के द्वारा कुँआ भर देने का हुकम दिया। देखते-ही-देखते कुँआ पूरा मिट्टी से भर गया। अब शेख तकी की खुशी का कोई ठिकाना न रहा। वो सोचने लगा कि अब साहिब से सदा के लिए छुटकारा मिल गया। इतने में बादशाह का एक सिपाही राजदरबार से वहाँ आया और शेख तकी को सूचना दी कि साहिब तो बादशाह के पास बैठे हैं और जनता को सत्य भक्ति का उपदेश दे रहे हैं। यह सुनकर शेख तकी को विश्वास नहीं हुआ और वो वहाँ पर देखने आ गया। साहिब को राजा के साथ देख शेख तकी शर्मिंदा होकर वहाँ से चला गया और साहिब को मारने का नया षड्यंत्र रचने लगा।

धर्म गुरु की इच्छा पर, कुँए में उतरे कबीर।
मिट्टी से कुँआ भर दिया, खुश हुआ तकी वजीर॥
राजे संदेशा भेजिया, मेरे पास फकीर कबीर॥