बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
पृष्ठ 38, कुल 122 में से
संदर्भ में पढ़ें36 साहिब बन्दगी
#(11) साहिब जी को मुगदर द्वारा मरवाया जाना
दिनों-दिन साहिब की बढ़ती हुई उपमा से परेशान क्रोध की आग में जलते हुए शेख तकी अपने साथी पंडित, मुल्लाओं सहित कहीं जा रहा था तो रास्ते में पहलवानों का अखाड़ा दिखाई दिया। वहाँ पर उसने बड़े-बड़े पहलवानों को भारी-भारी मुगदर घुमाते देखा। उसने विचार किया कि क्यों न कबीर को इन पहलवानों के मुगदरों से मरवाया जाए। यह सोचते-सोचते शेख तकी ने अपने बाकी साथियों से भी परामर्श किया। सबने इस युक्ति की सराहना की। अपने सिपाहियों को भेज तकी ने उस अखाड़े से दो बड़े पहलवानों को बुलवाया। जब वे शेख तकी के पास पहुँचे तो शेख तकी ने उन्हें उनका काम समझाया कि कैसे साहिब को जान से मारना है। पहलवानों को मुँह माँगा ईमान देने की बात भी कही। पहलवानों ने भी उसकी बात को मंजूर कर लिया। उचित समय पाकर तकी उन पहलवानों के साथ उस स्थान पर पहुँचा, जहाँ साहिब विराजमान होकर संगत को सत्य भक्ति का संदेश दे रहे थे। शेख तकी का हुक्म पाकर पहलवानों ने मुगदरों से साहिब पर प्रहार करने शुरू कर दिये। पर साहिब पर तो मानों फूलों की बारिश हो रही थी। आख़िर पहलवान प्रहार करते-करते थक गये और हार मानकर वहाँ से भाग गये। यह देख शेख तकी मन-ही-मन बहुत लज्जित हुआ। चारों ओर साहिब की जय-जयकार के जैकारे गूँजने लगे।
सत्संग देते साहिब पर, मुगदर से किये वार।
मुगदर चलाते पहलवां, थक कर गए हार॥
कुछ न बिगड़ा साहिब का, सब करते जय-जयकार॥