बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
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संदर्भ में पढ़ें40 साहिब बन्दगी
#(13) साहिब जी को भाले से मरवाया जाना
क्रोध से भरे शेख तकी ने साहिब की कसनियाँ लेते-लेते एक बार मन में विचार किया कि क्यों न कबीर को भाले से मरवा दिया जाए। यह युक्ति उसके पाखण्डी साथी पंडित, मुल्ला और मौलवी आदि सबको अच्छी लगी। इस युक्ति को सबने सराहा। उन्होंने सोचा कि कबीर अब कोई जादू भी नहीं कर पायेगा। शेख तकी ने फौरन कुशल भाला चलाने वाले को बुलवाया और उसे उसका काम बताकर कह दिया कि यदि वो कबीर को भाले से मार देगा तो उसे बहुत सारा मूँह मांगा ईनाम भी दिया जायेगा। भाला चलाने वाले ने मंजूर कर लिया। षडयंत्र के अनुसार उचित समय में शेख तकी ने भाला चलाने वाले को इशारा किया। इशारा पाकर भाले वाले ने साहिब पर अपने भाले के बड़े प्रहार किये। पर साहिब पर उनका कोई असर न देख वह बड़ा लज्जित हुआ और जब भाला स्वयं उसी को चोट पहुँचाने लगा तो भाला चलाने वाला वहाँ से भाग गया। यह देख शेख तकी भी मारे लज्जा के वहाँ से चला गया। तकी साहिब को समझने में बड़ी भूलकर रहा था।
पा ईशारा शेख तकी का, भाले से किया वार।
साहिब पर कोई असर न होये, किये बड़े प्रहार॥
जीव चितावन साहिब आए, कोई न माने बात।
कसनी लेने से न डरता, मूढ़ यह संसार॥