बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
पृष्ठ 46, कुल 122 में से
संदर्भ में पढ़ें44 साहिब बन्दगी
#(15) साहिब जी को पत्थर बाँधकर ऊँचे पहाड़ से #मारने के लिए नीचे गिराया जाना
चारों तरफ साहिब की जय-जयकार हो रही थी। साहिब को मारने में विफल हो रहे पाखण्डियों की नींद उड़ गई थी। ईर्ष्या पीड़ित शेख तकी ने एक दिन फिर साहिब को मारने का षडयंत्र रचा। साहिब को घूमने के बहाने वह ऊँचे पहाड़ पर ले गया। वहाँ पहुँचकर उसने अपने सैनिकों को आदेश दिया कि कबीर के शरीर पर एक भारी पत्थर बाँध दो और इसे पहाड़ी से नीचे फेंक दो। सैनिकों ने आज्ञा का पालन किया और साहिब के शरीर पर एक बहुत वज़नदार पत्थर बाँधकर पहाड़ी से नीचे गिरा दिया। जिस भारी पत्थर से साहिब को बाँधा था वो तो बीच में गायब हो गया। जब साहिब पहाड़ी के नीचे पहुँचे तो पहले ही पुष्पों का बहुत बड़ा बिछौना साहिब के लिए बिछ गया। साहिब उस पर ऐसे विराजमान हो गये जैसे कोई बात ही नहीं हुई हो। जो पत्थर सैनिकों ने बाँधा था, उसके गायब होने का किसी को पता भी नहीं चल पाया। शेख ने सोचा कि कबीर का अंत हो गया होगा। पर जब अगले दिन शेख तकी राजदरबार गया तो साहिब को राजदरबार में प्रवचन करते पाया तो उसकी लज्जा का अंत न रहा। उसकी ईर्ष्या की आग और बढ़ गई।
ऊँचे पर्वत भारी पत्थर, रस्सी से बाँधा कबीर। चोटी से नीचे गिराया, सब पीरों का पीर॥ पत्थर फूलों की सेज बना, ऐसा खेल रचाया। सतलोक के साहिब वासी, वहाँ काया न माया॥