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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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62 साहिब बन्दगी

(24) विलक्षण नाग को साहिब जी पर छोड़ा गया

साहिब को रास्ते से हटाने के सारे प्रयास फेल हो रहे थे। हर बार शेख तकी को लज्जित ही होना पड़ता। पर वो साहिब को जादूगर समझकर नये-नये षड्यंत्र रचने लगता था। कहीं से भी साहिब को मारने की कोई भी सलाह उसे देता तो वो फौरन मान लेता था। क्योंकि उसका एक ही लक्ष्य था कि किसी भी तरह से साहिब को हमेशा-हमेशा के लिए मिटा देना। शेख तकी के एक सूझवान साथी ने एक ऐसे विलक्षण नाग के बारे में बताया जिसके डंसते ही मनुष्य मर जाता है। शेख तकी ने फौरन उस नाग को मँगवाने का आदेश दे दिया। विलक्षण नाग आ गया। एक दिन जब बादशाह सिकंदर का राजदरबार लगा था और साहिब मध्य में आसन पर विराजमान होकर सत्य भक्ति का उपदेश दे रहे थे, शेख तकी ने ऐसे समय विलक्षण नाग की पटारी अपने हाथ में लेकर साहिब पर उस नाग को छोड़ा। शेख तकी साहिब की छवि को सबके सामने बिगाड़ने के चक्कर में था, पर उसे क्या पता था कि वो अपनी इन करतूतों से साहिब को अधिक-से-अधिक प्रसिद्ध किये जा रहा है। विलक्षण नाग साहिब को प्रणाम कर आकाश में उड़कर लुप्त हो गया। यह देख सब भक्तजन साहिब की जय-जयकार के जैकारे लगाने लगे।

नीचा दिखावन हेतु साहिब को, ऐसा नाग ले आये।
विलक्षण नाग अत डरावना, डसते ही मर जाये॥
नाग फूंकारे मारता, दिया साहिब पर छोड़।
कर प्रणाम साहिब को, उड़ा आकाश की ओर॥