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बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)

Bawan Kasni

सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा

स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)

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66 साहिब बन्दगी

(26) नीरू, नीमा और भक्तजनों को कत्ल करवाया

साहिब की बढ़ती हुई प्रसिद्धी को देख शेख तकी और भी तिलमला उठा। सिपाहियों को हुक्म दिया कि नीरू–नीमा और अन्य भक्तजन, जो कबीर के शिष्य हैं, उन्हें पकड़ कर हमारे पास लाओ। उसकी आज्ञानुसार सबको पकड़कर लाया गया तो शेख तकी ने अपनी तलवार उठाई और सबके गले काट दिये। जब साहिब को इस बात का पता चला तो वे शेख तकी के पास आये और आकर शेख तकी से कहने लगे कि वाह ! पीर जी, बड़ा बहादुरी वाला काम किया है, क्या पीरों के यही काम होते हैं ! इन्होंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था, जो तुमने इनको कत्ल किया ! तुम्हारी दुश्मनी तो मेरे साथ है।

साहिब ने उसी समय एक ऐसी तान सुनाई कि सब जीवित हो उठ खड़े हुए। सब साहिब की जय–जयकार करने लगे। अब शेख तकी को बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी। उसे अपने किये पर बहुत पछतावा भी हुआ। वो साहिब के चरणों पर गिरकर क्षमा माँगने लगा। दया के सागर साहिब ने उसे इस भूल पर भी क्षमा कर दिया पर शेख तकी अन्दर से बहुत घबराया हुआ था।

क्रोध अग्नि से जलते हुए, धर्म गुरु पकड़ी तलवार।
नीरु नीमा और शिष्य अनेका, सबको दीया मार॥
आ नजदीक बोले साहिब, यही पीरों के काम।
क्या बिगाड़ा इन्होंने तेरा, गले पै चली तलवार॥