बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
पृष्ठ 78, कुल 122 में से
संदर्भ में पढ़ें76 साहिब बन्दगी
(31) साहिब जी को सखुआ के पेड़ से बाँध कर मरवाया जाना
बादशाह सिकंदर के वजीर अथवा धर्म गुरु पीर शेख तकी को दुखी देख सभी मुल्ला, मौलवियों और पंडितों ने मिलकर एक नया षडयंत्र रचा। उन्हें एक मुल्ला द्वारा मालम पड़ा कि किसी को सखुआ के पेड़ के साथ सोने की तारों से बाँध दिया जाए तो उसकी जीवन लीला समाप्त हो जाती है। उन्होंने इस नये षडयंत्र की ख़बर धर्म गुरु शेख तकी को दी। तकी ने उनकी बात झट से स्वीकार कर ली और साहिब की एक और कसनी लेने को तैयार हो गया। उसने सिपाहियों द्वारा सखुआ के पेड़ का पता लगाया। सिपाही शेख तकी को साथ लेकर वहाँ गये और वो पेड़ दिखाया। फिर शेख तकी अपने सिपाहियों, मुल्ला, मौलवियों, पंडितों और साहिब को अपने साथ लेकर वहाँ पहुँचा। शेख तकी ने साहिब से कहा कि आप इस पेड़ के साथ खड़े हो जाएं। बिना देर किये साहिब तुरंत उस पेड़ के साथ खड़े हो गये। शेख तकी ने सिपाहियों को आदेश दिया कि कबीर को सोने की तारों से इस पेड़ के साथ बाँध दिया जाये। सिपाहियों ने ऐसा ही किया। पर साहिब का कुछ न बिगड़ा क्योंकि उनका शरीर तो पंच भौतिक तत्व का था ही नहीं, जो नष्ट होता। वो तो शब्द स्वरूपी थे, शेख तकी को इस बार भी मुँह की खानी पड़ी। बेइज्जत होकर वह वहाँ से चला गया।
सखुआ पेड़ में स्वर्ण तार से, जो व्यक्ति बंध जाये।
मुल्ला मिलकर सलाह बनाई, सूखे वाँग सुख जाये॥
बाँधने हेतु साहिब कबीर, धर्म गुरु फरमान सुनाया।
शब्द स्वरुपी सत्य साहिब को, अब तक कोई बाँध न पाया॥