बावन कसनी (कबीर साहिब को 52 बार सजाए मौत दी गई)
Bawan Kasni
सद्गुरु मधु परमहंस जी द्वारा
स्रोत: Sant Ashram Ranjari 2015 Edition · Sant Ashram Ranjari, Samba (J&K)
पृष्ठ 84, कुल 122 में से
संदर्भ में पढ़ें82 साहिब बन्दगी
(34) साहिब जी को फाँसी पर लटकाया जाना
पीरों के पीर कबीर साहिब का शेख तकी कसनियाँ ले लेकर परेशान हो गया था पर वो साहिब का कुछ भी बिगाड़ नहीं पा रहा था। एक दिन धर्म गुरु शेख तकी ने अपने साथी मुल्ला, मौलवियों और पंडितों से मिलकर सलाह बनाई कि क्यों न कबीर को फाँसी पर लटका दिया जाये। उसकी हर कोशिश बेकार हो रही थी। पर वो फिर भी साहिब को पहचान नहीं पा रहा था और साहिब को जादूगर समझ नयी-नयी युक्तियाँ सोच रहा था। पहली योजनाओं में शेख तकी ने कभी साहिब को जिंदा जलाया, कभी सात तालों के अलग-अलग हिस्से वाले मकान में बंद करवाया तथा दीवार में चिनवाया, पर बार-बार वह असफल रहता। क्रोध की आग से जलते हुए शेख तकी ने जल्लादों से फाँसी का तख्ता तैयार करवाया और साहिब को वहाँ ले गया। तकी का हुक्म पाकर जल्लादों ने साहिब को फाँसी पर लटका दिया। साहिब बहुत देर तक उसके साथ झूलते रहे, पर फाँसी का रस्सा साहिब का कुछ भी न बिगाड़ सका। यह देख शेख तकी और उनके पाखण्डी साथी बड़े लज्जित और दुःखी होकर वहाँ से मूँह नीचा करके चले गये।
साहिब को जादूगर समझ, कसनी के नये ढंग बनाये। हुआ फरमान धर्म गुरु का, फाँसी वाले हुक्म सुनाये॥ तुरंत हुक्म पर अमल हो गया, साहिब को दिया लटकाए। बड़ी देर तक लटके साहिब, पाखण्डी कुछ बिगाड़ न पाए॥