बेताल पच्चीसी
Betal Pachisi
महाकवि सोमदेव / बेताल भट्ट द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंनौवां बेताल
राजकुमारी अनंगरति की कथा
पहले की भांति उस शिंशपा-वृक्ष के पास पहुंचकर राजा विक्रमादित्य ने बेताल को फिर से नीचे उतारा और उसे अपने कंधे पर डालकर गंतव्य की ओर चल पड़ा।
रास्ते में फिर बेताल ने मौन भंग किया—‘‘राजन ! कहां राज्य का सुख-भोग और कहां रात के इस प्रहर में इस महाश्मशान में घूमना। क्या तुम भूत-प्रेतों से भरे इस श्मशान को नहीं देखते, जो रात में भयानक बना हुआ है और जहां चिता के धुएं की तरह अंधकार बढ़ता जा रहा है। तुमने उस योगी के कहने पर न जाने क्यों इस असाध्य कार्य को करना स्वीकार कर लिया है। मुझे यह सोचकर तुम पर दया आ रही है। तुम्हारा श्रम भुलाने के लिए मै तुम्हें फिर से एक कथा सुनाता हूं, ताकि तुम्हारा मार्ग सुगम हो।’’
तब विक्रमादित्य के सहमति देने पर बेताल ने यह कथा सुनाई।
अवन्ती में एक नगरी है, जिसे सृष्टि के आरंभ में देवताओं ने बनाया था। सर्पों (सांपों) और भभूत (भस्म) से विभूषित शिव के विराट शरीर के समान वह नगरी भी बहुत विशाल थी और ऐश्वर्य के प्रत्येक साधन से सुशोभित थी।
जो नगरी सतयुग में पद्मावती, त्रेता में भोगवती तथा द्वापर में हिरण्यवती कही जाती थी, वही कलियुग में उज्जायिनी के नाम से प्रसिद्ध हुई। उस उज्जायिनी में वीरदेव नाम के एक राजा थे, जो भूपतियों में श्रेष्ठ थे। उनकी पटरानी का नाम पद्मरति था। पुत्र की कामना से उस राजा ने अपनी पत्नी सहित मंदाकिनी के तट पर जाकर, तपस्या के द्वारा भगवान महादेव की आराधना की।
बहुत दिनों तक तपस्या करने के बाद जब उन्होंने स्नान और अर्चन की विधियां पूर्ण कर लीं, तो भगवान शंकर प्रसन्न हुए और आकाश से उनकी वाणी सुनाई पड़ी—‘‘राजन, तुम्हारे कुल में पराक्रमी पुत्र उत्पन्न होगा। अतुलनीय रूपवती एक कन्या भी तुम्हारे घर में जन्म लेगी, जो अपनी सुंदरता से अप्सराओं को भी मात करेगी।‘‘
यह आकाशवाणी सुनकर राजा वीरदेव की कामना पूरी हो गई। वह अपनी पत्नी सहित अपनी नगरी में चला आया। वहां, पहले उसे शूरदेव नाम का एक पुत्र पैदा हुआ और फिर उसकी पद्मरति ने एक कन्या को जन्म दिया। अपने सौंदर्य से कामदेव के मन में भी आकर्षण उत्पन्न करने वाली उस कन्या का नाम उसके पिता ने अनंगरति रखा।
जब वह कन्या बड़ी हुई, तब उसके योग्य पति प्राप्त करने के लिए उसके पिता ने भूमंडल के सभी राजाओं के चित्र मंगवाए। राजा को जब उनमें से कोई भी अपनी कन्या
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