भारतकोश
भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

भैषज्य रत्नावली (गोविन्ददास सेन - सान्वय भाषा टीका सहित)

Bhaishajya Ratnavali Hindi

कविराज गोविन्ददास सेन (टीकाकार: वैद्य शंकरलाल) द्वारा

स्रोत: Bhaishajya Ratnavali with Hindi Translation by Vaidya Shankar Lal (1942) (उद्गम)

DevanagariHindipublished1,416 पृष्ठ

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॥ श्रीः ॥

भैषज्यरत्नावली-विषयानुक्रमणिका।


विषय.पृष्ठ.विषय.पृष्ठ.
मंगलाचरणम्किरातादि, पिप्पल्यादि, बृहद्गुडूच्यादि२८
आयुर्वेदके लक्षण, आयुर्वेदकी निरुक्तिगुडूच्यादि, द्राक्षादि
आयुर्वेदकी उत्पत्तिरास्नादि, गुडूच्यादि, दशमूलादि२९
चिकित्साप्रकरणम्।पित्तज्वरकी चिकित्सा
मानकी परिभाषा१०तिक्तादि
ज्वरकी चिकित्सा१३कट्फलादि, पर्पटादि३०
षडङ्गपानीय१७द्राक्षादि, पटोलादि
षडङ्गादि साधन१८ह्रीबेरादि, कलिङ्गादि, विश्वादि३१
माँड आदिके लक्षण१९गुडूच्यादि, किरातादि
अन्नादि साधन, ज्वरमें पथ्यमहाद्राक्षादि, यवपटोल३२
ज्वरकी तीन अवस्था, जीर्णज्वर के लक्षण२१नागरादि, अमृतादि
ज्वररोगीको कषाय पिलानेका नियमविदारिकादि, धान्यशर्करा३३
आमज्वरके लक्षणश्रीपर्ण्यादि, पर्पटादि
कषायादि ओषधियोंके सेवन का निषेध२२गुडूच्यादि, भूनिम्बादि, धान्याकक्वाथ३४
अभुक्त अवस्थामें औषध सेवन के गुणमृद्वीकादि, दुरालभादि
जीर्णाजीर्ण-औषधिके लक्षण२३त्रायमाणादि३५
मात्राका निरूपणकफज्वरकी चिकित्सा
सामान्य ज्वरकी चिकित्सा२४मधुपिप्पली, चतुर्भद्रावलेह
धान्य-पटोलक्वाथ, वृश्चीरादि-क्षीरपान२४सिन्धुवारक्वाथ
गुडूच्यादिसप्तच्छदादि, वासादि, निम्बादि३६
आरग्वधादि, पथ्यादि२५मरिचादि, त्रिफलादि
बृहत्पर्पटकादिमुस्तादि, कटुत्रिकादि३७
नागरादि, मुस्तादिपिप्पल्यादिगण, सारिवादि
नागरादि, किराततिक्तकादि२६आमलक्यादि, हरिद्रादि, अभयादि३८
वातज्वरकी चिकित्साव्याघ्यादि, पटोलादि
बिल्वादि, भूनिम्बादि, विश्वादिभूनिम्बादि३९
पञ्चमूल्यादि, कणादि२७वात-पित्तज्वरकी चिकित्सा
शालपर्णी आदि, शतपुष्पादिनवाङ्ग क्वाथ, निदिग्धिकादि