भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)
Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary
श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा
DevanagariHindipublished380 पृष्ठ
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श्रीकृष्ण के मित्र तथा अन्य लाल्याभिमानियों की गौरवप्रीति [ २७७ प्रकार की तुष्टि तब देखी गई, जब श्रीकृष्ण कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि से अपने घर द्वारका को लौटे। आनन्द की अतिशयतावश उनके भावोन्मत्त पुत्र बारम्बार हड़बड़ा गये। इस प्रकार का हड़बड़ाना पूर्णतुष्टि का लक्षण है। प्रद्युम्न प्रतिदिन अश्रुपूरित नेत्रों से श्रीकृष्ण के चरणकमलों का दर्शन किया करते थे। जिन लक्षणों को पूर्व में सम्भ्रमप्रीति के विषय में कहा गया है, उन्हीं को प्रद्युम्न की गौरवप्रीति के सम्बन्ध में भी समझ लेना चाहिये।