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भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

भक्तिरसामृतसिन्धु (श्रील रूप गोस्वामी - भक्ति रस शास्त्र सटीक)

Bhakti-Rasamrita-Sindhu with Hindi Commentary

श्रील रूप गोस्वामी / भक्तिवेदान्त व्याख्या द्वारा

DevanagariHindipublished380 पृष्ठ

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की परिस्थिति उपस्थित हो जाती है । इसी प्रकार का एक वाक्य गोपांग- नाओं ने राधारानी के तथाकथित पति अभिमन्यु की बहन (जटिला की पुत्री) कुटिला से कहा था। यह वाक्य परोक्ष रूप से कुटिला को अपमानित करने वाला था। 'हे कुटिले ! जटिलापुत्री ! तेरे स्तन लौकी के समान लटक गये हैं; नाक की आकृति मेढकी के समान मालूम होती है; दृष्टि की शोभा कुतिया को लजाने वाली है, अधर जलते हुए कोयले को लजा रहे हैं और पेट मृदंग के समान बड़ा है। इसलिये हे सुन्दरी कुटिले ! तू वृन्दा- वन की सब गोपांगनाओं में सर्वोत्कर्षमयी है। तेरी इसी असाधारण सुन्दरता के कारण श्रीकृष्ण की वंशीध्वनि में इतनी सामर्थ्य नहीं कि वह तेरा आकर्षण कर सके।"