भक्तियोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)

भक्तियोग (स्वामी विवेकानन्द - हिन्दी अनुवाद)
Bhakti Yoga - Swami Vivekananda (Hindi)
स्वामी विवेकानन्द / प्रा. डॉ. विद्याभास्कर शुक्ल द्वारा
DevanagariHindipublished140 पृष्ठ
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३२ भक्तियोग
समान् चारों ओर ठोकरें खाते हुए भटकते फिरते हैं।"* संसार तो ऐसे लोगों से भरा पड़ा है। हर एक आदमी गुरु होना चाहता है। एक भिखारी भी चाहता है कि वह लाखों का दान कर डाले ! जैसे हास्यास्पद ये भिखारी हैं, वैसे ही ये गुरु भी !
* अविद्यायाम् अन्तरे वर्तमानाः ।
स्वयं धीराः पण्डितम्मन्यमानाः ।
जङ्घन्यमानाः परियन्ति मूढाः ।
अन्धेनैव नीयमानाः यथान्धाः ॥ —मुण्डकोपनिषद्, १।२।८