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भामती (वाचस्पति मिश्र - ब्रह्मसूत्र शाङ्करभाष्य चतुःसूत्री हिन्दी व्याख्या)

Bhamati of Vachaspati Mishra Hindi

वाचस्पति मिश्र (व्याख्याकार: स्वामी योगेन्द्रानन्द) द्वारा

स्रोत: Brahma Sutra Shankara Bhashya with Vachaspati Mishra Bhamati and Hindi Commentary (उद्गम)

DevanagariHindipublished639 पृष्ठ

६१८ ब्रह्मसूत्रशाङ्करभाष्यम् [अ. २ पा. १ सू. ३७

इति, तस्मादनतिशङ्कनीयमिदमौपनिषदं दर्शनमिति ॥ ३७ ॥
इति श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यशङ्करभगवत्पूज्यपादकृतो शारीरक-
मीमांसाभाष्ये द्वितीयाध्यायस्य सांख्यादिप्रयुक्ततर्कैश्च वेदान्त-
समन्वयविरोधपरिहाराख्यः प्रथमः पादः समाप्तः ॥ १ ॥
——०——


भामती

सर्वानुपपत्तिशङ्का परास्ता । तस्माज्जगत्कारणं ब्रह्मेति सिद्धम् ॥ ३७ ॥
इति श्रीवाचस्पतिमिश्रविरचिते भगवत्पादशारीरकभाष्यविभागे भामत्यां
द्वितीयाध्यायस्य प्रथमः पादः समाप्तः ॥


भामती-व्याख्या

उपपन्न हो जाता है—"न हि मायायां काचिदनुपपत्तिः" (ब्र. सि. पृ. २०)। आचार्य गौडपाद भी कहते हैं—

"स्वप्नमाये यथा दृष्टे गन्धर्वनगरं यथा ।
तथा विश्वमिदं दृष्टं वेदान्तेषु विचक्षणैः ॥" (आगम. २।३२)

स्वामियोगीन्द्रानन्दोदासीनविरचितायां भामतीव्याख्यायां
अविरोधाख्यस्य द्वितीयाध्यायस्य
प्रथमः पादः समाप्तः ।

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