भारतकोश
भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

भावप्रकाश: चिकित्सा भाग (भावमिश्र - विद्योतिनी सविस्तार हिन्दी व्याख्या सम्पूर्ण कायचिकित्सा)

Bhavaprakasha Chikitsa Bhaga with Vidyotini Commentary

आचार्य भावमिश्र (टीकाकार: पं. ब्रह्मशंकर मिश्र एवं रूपलालजी वैश्य) द्वारा

DevanagariHindipublished1,167 पृष्ठ

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निघण्टु-विवरण में आये हुए द्रव्यों की अकाराद्यनुक्रमणिका ३१ विषया: पृ० | विषया: पृ० | विषया: पृ० वत्सनाभ ७८३ | शालिधान्य ७८९ | सर्जक ६७९ वनककोड़ा ६२८ | शिम्बीधान्य ७९६ | सर्पाक्षी ६१५ वनतुलसी ६७० | शिलाजीत ७६६ | सहदेवी ५३९ वनहलदी ३११ | शिलारस ३९९ | सहिजना ५१२ वर्मीमत्स्य ८७० | शिलीन्ध्र (शिलिन्द मछली) ८६९ | सागोन ७०६ वर्षाभू (पथरी) ५८७ | शीतलचीनी ४३९ | सांभर मृग ८६१ वायविडङ्ग २५२ | शीसम ६८१ | सातला ४८५ वाराही कंद ५५४, ८५० | शुक्लजीरक २३३ | साम्भर नमक ३४८ विकङ्कत (कंटाई) ७३४ | शृङ्गिक विष ७८५ | सालई ६८० विजयसार ६८२ | शृङ्गी (सींगी मछली) ८६९ | साँवा ८१० विडङ्ग भेद २५४ | श्वेतदूर्वा ५५४ | सिंघाड़ा ७३५ विदारीकन्द ५५५ | श्वेतार्क ४७९ | सितोपला (मिश्री) ९४३ विदारीकन्द (क्षीरविदारी) ५५७ | श्वेतसारिवा ५९१ | सेन्दुरिया ६६६ विशाला ५७२ | ष | सिन्दूर ७६६ विक्किर (पक्षी) ८६२ | षष्टिक धान्य ७९२ | सिरस ६७७ वीरतरु ६३४ | स | सिवार ६४७ विष्णुक्रान्ता ६१६ | सत्तुक विष ७८४ | सिहोरा ७०० वीरण खस ४२० | सज्जी ३५४ | सीसा ७६१ वृद्धदारक ५७५ | सतौना ७०४ | सुगन्धबाला ४१९ वृद्धदारु ५७५ | सत्तू ८९१ | सुगन्धवास्तुक . ८१६ वेतस (वेदमूश्क) ५३१ | सनाय ६२९ | सुदर्शन ६३७ वैदूर्यम ७८१ | सन्तानिका (मलाई) ९११ | सुरमा ७३३ व्याघ्रेरण्ड ४७७ | सपादमत्स्य ८७१ | सुपारी ७२० श | सप्तला (तितली) ४८७ | सुहागा ३५८, ७७४ शङ्ख ७७६ | सफेद खैर ६८५ | सूरनकन्द ८४४ शङ्खपुष्पी ६१६ | सफेद पाढ़ल (घंटापाढ़र) ४५८ | सेंधानमक ३४५ शङ्खालुक ८४५ | सफेद सुरमा ७७३ | सेम ८३९ शणपुष्पी ५९४ | समुद्र नमक ३४८ | सेमर ६९५, ८३० शतावरी ५५९ | समुद्रफेन २५९ | सेव ७४५ शर्करा ९४३ | सम्हालू-निर्गुण्डी ५१६ | सोआ २३७ शल्लकी ३९७ | सरफोंका ५७३ | सोंचर नमक ३५१ शष्कुलीमत्स्य (सौरी) ८७० | सरसों ८०७, ८२९ | सोंठ २१६ शाल ६७९ | सरल निर्यास ३९३ | सोया २३७ शालपर्णी ४६३ | | सोनापाठा ४६१