भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 117, कुल 654 में से
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- संक्षिप्त भविष्यपुराण *
शुभाशुभ स्वप्न और उनके फल
ब्रह्माजी बोले— याज्ञवल्क्य ! जो व्यक्ति ससमीमें उपवास करके विधिपूर्वक सूर्यनारायणका पूजन, जप एवं हवन आदि क्रियाएँ सम्पन्नकर रात्रिके समय भगवान् सूर्यका ध्यान करते हुए शयन करता है, तब उसे रात्रिमें जो स्वप्न दिखायी देते हैं, उन स्वप्न-फलोंका मैं अब वर्णन कर रहा हूँ। यदि स्वप्नमें सूर्यका उदय, इन्द्रध्वज और चन्द्रमा दिखायी दे तो सभी समृद्धियाँ प्राप्त होती हैं। माला पहने व्यक्ति, गाय या वंशीकी आवाज, श्वेत कमल, चामर, दर्पण, सोना, तलवार, पुत्रकी प्राप्ति, रुधिरका थोड़ा या अधिक मात्रामें निकलना तथा पान करना ऐसा स्वप्न देखनेसे ऐश्वर्यकी प्राप्ति होती है। घृताक्त प्रजापतिके दर्शनसे पुत्र-प्राप्ति का फल होता है। स्वप्नमें प्रशस्त वृक्षपर चढ़े अथवा अपने मुखमें महिषी, गौ या सिंहनीका दोहन करे तो शीघ्र ही ऐश्वर्य प्राप्त होता है। सोने या चाँदीके पात्रमें अथवा कमल-पत्रमें जो स्वप्नमें खीर खाता है उसे बलकी प्राप्ति होती है। घृत, वाद तथा युद्धमें विजयप्राप्ति का जो स्वप्न देखा है, वह सुख प्राप्त करता है। स्वप्नमें जो अग्नि-पान करता है, उसके जठराग्निकी वृद्धि होती है। यदि स्वप्नमें अपने अङ्ग प्रज्वलित होते दिखायी दें और सिरमें पीड़ा हो तो सम्पत्ति मिलती है। श्वेतवर्णके वस्त्र,
माला और प्रशस्त पक्षीका दर्शन शुभ होता है। देवता-ब्राह्मण, आचार्य, गुरु, वृद्ध तथा तपस्वी स्वप्नमें जो कुछ कहते हैं, वह सत्य होता है। स्वप्नमें सिरका कटना अथवा फटना, पैरोंमें बेड़ीका पड़ना, राज्य-प्राप्ति का संकेतक है। स्वप्नमें रोनेसे हर्षकी प्राप्ति होती है। घोड़ा, बैल, श्वेत कमल तथा श्रेष्ठ हाथीपर निडर होकर चढ़नेसे महान् ऐश्वर्य प्राप्त होता है। ग्रह और ताराओंका ग्रास देखे, पृथ्वीको उलट दे और पर्वतको उखाड़ फेंके तो राज्यका लाभ होता है। पेटसे आँत निकले और उससे वृक्षको लपेटे, पर्वत-समुद्र तथा नदी पार करे तो अत्यधिक ऐश्वर्यकी प्राप्ति होती है। सुन्दर स्त्रीकी गोदमें बैठे और बहुत-सी स्त्रियाँ आशीर्वाद दें, शरीरको कीड़े भक्षण करें, स्वप्नमें स्वप्नका ज्ञान हो, अभीष्ट बात सुनने और कहनेमें आये तथा मङ्गलदायक पदार्थोंका दर्शन एवं प्राप्ति हो तो धन और आरोग्यका लाभ होता है। जिन स्वप्नोंका फल राज्य और ऐश्वर्यकी प्राप्ति है, यदि उन स्वप्नोंको रोगी देखा है तो वह रोगसे मुक्त हो जाता है। इस प्रकार रात्रिमें स्वप्न देखनेके पश्चात् प्रातःकाल स्नानकर राजा-ब्राह्मण अथवा भोजकको अपना स्वप्न सुनाना चाहिये।
(अध्याय ६९)
१-देवह्विजजनाचार्यगुरुवृद्धतपस्विनः
॥
यद्यद्वदन्ति तत्सर्वं सत्यमेव हि निर्दिशेत्। (ब्राह्मपर्व ६९।१४-१५)
२-भारत तथा विदेशोंमें भी मैटिनी आदिके 'डिक्शेनरी ऑफ़ ड्रीम्स' आदि अनेक ग्रन्थ हैं। बृहस्पतिप्रोक्त 'स्वप्नाध्याय' ग्रन्थ विशेष प्रसिद्ध है। वाल्मीकीय रामायणमें त्रिजटाके स्वप्नका वर्णन ध्येय है। स्वप्नका योगसे घनिष्ठ सम्बन्ध है। सभीके संयुक्त अध्ययनसे साधकोंको विशेष लाभ हो सकता है।
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