भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

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पृष्ठ 119

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

हे अदितिके पुत्र भगवान् सूर्य! आप प्रभाकर, मित्र, गोपति (किरणोंके स्वामी) तथा दिक्पति नामवाले हैं, आपको मेरा नित्य नमस्कार है।

नमो धात्रे विधात्रे च अर्यम्णे वरुणाय च।

पूष्णे भगाय मित्राय पर्जन्यायांशवे नमः॥

धाता, विधाता, अर्यमा, वरुण, पूषा, भग, मित्र, पर्जन्य, अंशुमान् नामवाले भगवान् सूर्यको मेरा प्रणाम है।

नमो हितकृते नित्यं धर्माय तपनाय च।

हरये हरिताश्वाय विश्वस्य पतये नमः॥

हितकृत (संसारका कल्याण करनेवाले), धर्म, तपन, हरि, हरिताश्व (हरे रंगके अश्वोंवाले), विश्वपति भगवान् सूर्यको नित्य मेरा नमस्कार है।

विष्णवे ब्रह्मणे नित्यं त्र्यम्बकाय तथात्मने।

नमस्ते ससलोकेश नमस्ते सससमये॥

विष्णु, ब्रह्मा, त्र्यम्बक (शिव), आत्मस्वरूप, ससससि, हे ससलोकेश! आपको मेरा नमस्कार है।

एकस्मै हि नमस्तुभ्यमेकचक्रथाय च।

ज्योतिषां पतये नित्यं सर्वप्राणभूते नमः॥

अद्वितीय, एकचक्रथ (जिनके रथमें एक ही चक्र है), ज्योतिष्यति, हे सर्वप्राणभूत! (सभी प्राणियोंका भरण-पोषण करनेवाले) आपको मेरा नित्य नमस्कार है।

हिताय सर्वभूतानां शिवायार्तिहराय च।

नमः पद्मप्रबोधाय नमो वेदादिमूर्तये॥

समस्त प्राणिजगत्का हित करनेवाले, शिव (कल्याणकारी) और आर्तिहर (दुःखविनाशी), पद्मप्रबोध (कमलोंको विकसित करनेवाले), वेदादिमूर्ति भगवान् सूर्यको नमस्कार है।

काधिजाय नमस्तुभ्यं नमस्तारासुताय च।

भीमजाय नमस्तुभ्यं पावकाय च वै नमः॥

प्रजापतियोंके स्वामी महर्षि कश्यपके पुत्र! आपको नमस्कार है। भीमपुत्र तथा पावक नामवाले तारासुत! आपको नमस्कार है, नमस्कार है।

धिषणाय नमो नित्यं नमः कृष्णाय नित्यदा।

नमोऽस्वददितिपुत्राय नमो लक्ष्याय नित्यशः॥

धिषण, कृष्ण, अदितिपुत्र तथा लक्ष्य नामवाले भगवान् सूर्यको बार-बार नमस्कार है।

ब्रह्माजीने कहा—याज्ञवल्क्य! जो मनुष्य सायंकाल और प्रातःकाल इन नामोंका पवित्र होकर पाठ करता है, वह मेरे समान ही मनोवाञ्छित फलोंको प्राप्त करता है। इस नाम-स्तोत्रसे सूर्यकी आराधना करनेपर उनके अनुग्रहसे धर्म, अर्थ, काम, आरोग्य, राज्य तथा विजयकी प्राप्ति होती है। यदि मनुष्य बन्धनमें हो तो इसके पाठसे बन्धनमुक्त हो जाता है। इसके जप करनेसे सभी पापोंसे छुटकारा मिल जाता है। यह जो सूर्यस्तोत्र मैंने कहा है, वह अत्यन्त रहस्यमय है।

(अध्याय ७१)

जम्बूद्वीपमें सूर्यनारायणकी आराधनाके तीन प्रमुख स्थान,

दुर्वासा मुनिका साम्बको शाप देना

सुमन्तु मुनि बोले—राजन्! ब्रह्माजीसे इस प्रकार उपदेश प्राप्तकर याज्ञवल्क्य मुनिने सूर्यभगवान्की आराधना की, जिसके प्रभावसे उन्हें सालोक्य-मुक्ति प्राप्त हुई। अतः भगवान् सूर्यकी उपासना करके आप भी उस देवदुर्लभ मोक्षको प्राप्त

कर सकेंगे।

राजा शतानीकने पूछा—मुने! जम्बूद्वीपमें भगवान् सूर्यदेवका आदि स्थान कहाँ है? जहाँ विधिपूर्वक आराधना करनेसे शीघ्र ही मनोवाञ्छित फलोंकी प्राप्ति हो सके।

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