भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

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  • संक्षिप्त भविष्यपुराण *

नक्षत्रमें श्वेत पुष्पसे पूजे गये भगवान् पूषा सदैव मङ्गल प्रदान करते हैं और अचल धृति तथा विजय भी देते हैं।

अपनी सामर्थ्यके अनुसार भक्तिसे किये गये पूजनसे ये सभी सदा फल देनेवाले होते हैं। यात्रा करनेकी इच्छा हो अथवा किसी कार्यको प्रारम्भ करनेकी इच्छा हो तो नक्षत्र-देवताकी पूजा आदि करके ही वह सब कार्य करना उचित है। इस

प्रकार करनेपर यात्रामें तथा क्रियामें सफलता होती है—ऐसा स्वयं भगवान् सूर्यने कहा है।

ब्रह्माजीने कहा— मधुसूदन! आप भक्तिपूर्वक सूर्यकी आराधना करें; क्योंकि भगवान् सूर्यकी नित्य पूजा, नमस्कार, सेवा-व्रत, उपवास, हवनादि तथा विविध प्रकारसे ब्राह्मणोंको तृप्त करनेसे मनुष्य पापरहित होकर सूर्यलोकको प्राप्त करता है।

(अध्याय १०२)

सूर्य-पूजाका माहात्म्य

ब्रह्माजी बोले— मधुसूदन! जो मनुष्य भक्तिपूर्वक सूर्यदेवका मन्दिर बनवाता है, वह अपनी सात पीढ़ियोंको दिव्य सूर्यलोक प्राप्त करा देता है। सूर्यदेवके मन्दिरमें जितने वर्षपर्यन्त भगवान् सूर्यकी पूजा होती है, उतने हजार वर्षोंतक वह सूर्यलोकमें आनन्द प्राप्त करता है। जिसके घरमें अर्घ्य, पुष्प, चन्दन, नैवेद्य आदिके द्वारा भगवान् सूर्यकी विधिपूर्वक आराधना होती है, वह चाहे सकाम हो या निष्काम, वह सूर्यकी साम्यता प्राप्त कर लेता है। भगवान् सूर्यमें अपने मनको लगाकर जो व्यक्ति अत्यन्त सुगन्धित मनोहारी पुष्प, विजय तथा अमृतादि नामक धूप, अत्यधिक सुगन्धित कर्पूरादिके विलेपनका लेप, दीपदान, नैवेद्य आदि उपहार भगवान् सूर्यनारायणको प्रतिदिन अर्पण करता है, वह अपनी अभीष्ट इच्छा प्राप्त कर लेता है। यज्ञाधिपति भगवान् भास्कर यज्ञोंसे भी प्रसन्न होते हैं, किंतु धनवान् तथा लोकसंचयी मनुष्य ही बहुत-से संसाधनों और नाना प्रकारके सम्भारोंसे युक्त एवं विस्तृत (अश्ममेध तथा राजसूयादि) यज्ञ सम्पन्न कर पाते हैं, इसलिये यदि मनुष्य भगवान् सूर्यकी भक्तिभावसे दूर्वाङ्गुरोंसे भी पूजा करते हैं तो सूर्यदेव उन्हें इन सभी यज्ञोंके करनेसे प्राप्त होनेवाले अति दुर्लभ फलको प्रदान कर देते हैं।

सूर्यदेवको अर्पित करनेयोग्य पुष्प, भोज्य-पदार्थ—नैवेद्य, धूप, गन्ध और शरीरमें लगानेवाला अनुलेप्य-पदार्थ, भूषण और लाल वस्त्र जो भी उपहार तथा भक्ष्य फल है, वह सब सूर्यदेवके अनुरूप होना चाहिये। उन आदिदेव यज्ञपुरुषकी आप यथाशक्ति आराधना करें। भगवान् सूर्यके मन्दिरमें जो चित्रभानु भगवान् दिवाकरको तीर्थके पवित्र जल, गन्ध, मधु, घृत और दूधसे स्नान कराता है, वह स्वर्गलोकके समान मधुर दूध-दहीसे सम्पन्न हो जाता है अथवा शाश्वत शान्तिको प्राप्त कर लेता है। अनेक विदेहवंशीय जनक नामसे प्रख्यात राजा और हैहयवंशी नृपतिगण भगवान् सूर्यकी आराधनासे अमरत्वको प्राप्त हो गये हैं। इसलिये आप भी विधिपूर्वक उपासनासे भगवान् भास्करको संतुष्ट करें, इससे प्रसन्न हुए भगवान् सूर्य शान्ति प्रदान करते हैं।

विष्णुने पूछा— ब्रह्मन्! भगवान् सूर्य उपवाससे कैसे संतुष्ट होते हैं? उपवास करनेवाले भक्तके द्वारा इनकी आराधना किस प्रकार की जाय? इसे आप बतायें।

ब्रह्माजीने कहा— जब भोगपरायण व्यक्ति भी धूप, पुष्प आदि उपचारोंसे भगवान् सूर्यकी तन्मयतापूर्वक आराधना कर कल्याण प्राप्त कर

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