भारतकोश
भविष्य पुराण

भविष्य पुराण

Bhavishya Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished654 पृष्ठ

पृष्ठ 208, कुल 654 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 208
  • ब्राह्मपर्व *

११७

किरणोंवाले, सात अक्षोंसे युक्त रथपर आरूढ़, सिन्दूरके समान रक्त आभावाले, सभी देवताओंद्वारा नमस्कृत भगवान् सूर्य ग्रहपीडा निवारण करनेवाली महाशान्ति आपको प्रदान करें। शीतल किरणोंसे युक्त, अमृतात्मा, अत्रिके पुत्र चन्द्रदेव सौम्यभावसे आपकी ग्रहपीडा दूर करें। पद्मरागके समान वर्णवाले, मधुके समान पिङ्गल नेत्रवाले, अग्निसदृश अङ्गारक, भूमिपुत्र भौम आपकी ग्रहपीडा दूर करें। पुष्परागके समान आभायुक्त, पिङ्गल वर्णवाले, पीत माल्य तथा वस्त्र धारण करनेवाले बुध आपकी पीडा दूर करें। तप्त स्वर्णके समान आभायुक्त, सर्वशास्त्रविशारद, देवताओंके गुरु बृहस्पति आपकी ग्रहपीडा दूर कर आपको शान्ति प्रदान करें। हिम, कुन्दपुष्प तथा चन्द्रमाके समान स्वच्छ वर्णवाले, दैत्य तथा दानवोंसे पूजित, सूर्यार्चनमें तत्पर रहनेवाले, महामति, नीतिशास्त्रमें पारङ्गत शुक्राचार्य आपकी ग्रहपीडा दूर करें। विविध रूपोंको धारण करनेवाले, अविज्ञात-गतियुक्त, सूर्यपुत्र शनैश्चर, अनेक शिखरोंवाले केतु एवं राहु आपकी पीडा दूर करें। सर्वदा कल्याणकी दृष्टिसे देखनेवाले तथा भगवान् सूर्यकी नित्य अर्चना करनेमें तत्पर ये सभी ग्रह

प्रसन्न होकर आपको शान्ति प्रदान करें।'

तदनन्तर ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश—इन त्रिदेवोंसे इस प्रकार शान्तिकी प्रार्थना करें१—

‘पद्मासनपर आसीन, पद्मवर्ण, पद्मपत्रके समान नेत्रवाले, कमण्डलुधारी, देव-गन्धर्वोंसे पूजित, देवशिरोमणि, महातेजस्वी, सभी लोकोंके स्वामी, सूर्यार्चनमें तत्पर चतुर्मुख, दिव्य ब्रह्म शब्दसे सुशोभित ब्रह्माजी आपको शान्ति प्रदान करें। पीताम्बर धारण करनेवाले, शङ्खु, चक्र, गदा तथा पद्म धारण करनेवाले चतुर्भुज, श्यामवर्णवाले, यज्ञस्वरूप, आत्रेयीके पति और सूर्यके ध्यानमें तल्लीन माधव मधुसूदन विष्णु आपको नित्य शान्ति प्रदान करें। चन्द्रमा एवं कुन्दपुष्पके समान उज्ज्वल वर्णवाले, सर्पादि विशिष्ट आभरणोंसे अलंकृत, महातेजस्वी, मस्तकपर अर्धचन्द्र धारण करनेवाले, समस्त विश्वमें व्याप्त, श्मशानमें रहनेवाले, दक्ष-यज्ञ विध्वंस करनेवाले, वरणीय, आदित्यके देहसे सम्भूत, वरदानी, देवाधिदेव तथा भस्म धारण करनेवाले महेश्वर आपको शान्ति प्रदान करें।’

तदनन्तर सभी मातृकाओंसे शान्तिके लिये प्रार्थना करें२—

१- पद्मासनः पद्मवर्णः पद्मपत्रनिभेक्षणः। कमण्डलुधरः श्रीमान् देवगन्धर्वपूजितः॥

चतुर्मुखो देवपतिः सूर्यार्चनपरः सदा।

सुरज्येष्ठो महातेजाः सर्वलोकप्रजापतिः। ब्रह्मशब्देन दिव्येन ब्रह्मा शान्तिं करोतु ते॥

पीताम्बरधरो देव आत्रेयीदयितः सदा। शङ्खुचक्रगदापाणिः श्यामवर्णश्चतुर्भुजः॥

यज्ञदेहः क्रमो देव आत्रेयीदयितः सदा। शङ्खुचक्रगदापाणिर्माधवो मधुसूदनः॥

सूर्यभक्तान्वितो नित्यं विगतर्विगतत्रयः। सूर्यध्यानपरो नित्यं विष्णुः शान्तिं करोतु ते॥

शशिकुन्देन्दुसंकाशो विश्रुताभरणेरिह। चतुर्भुजो महातेजाः पुष्पार्धकृतशेखरः॥

चतुर्मुखो भस्मधरः श्मशाननिलयः सदा। गोत्रादिरिर्विंशनिलयस्तथा च क्रतुदूषणः॥

वरो वरेण्यो वरदो देवदेवो महेश्वरः। आदित्यदेहसम्भूतः स ते शान्तिं करोतु वै॥

(ब्राह्मपर्व १७६। १-८)

२- पद्मरागप्रभा देवी चतुर्वदनपङ्कजा। अक्षमालार्पितकरा कमण्डलुधरा शुभा॥

ब्रह्माणी सौम्यवदना आदित्याराधने रता। शान्तिं करोतु सुप्रीता आशीर्वादपरा खग॥

महाश्वेतैति विख्याता आदित्यदयिता सदा। हिमकुन्देन्दुसदृशा महावृषभवाहिनी॥

त्रिशूलहस्ताभरणा विश्रुताभरणा सती। चतुर्भुजा चतुर्वक्त्रा त्रिनेत्रा पापनाशिनी।

वृषध्वजार्चनरता रुद्राणी शान्तिदा भवेत्॥

मयूरवाहना देवी सिन्दूरारुणविग्रहा। शक्तिहस्ता महाकाया सर्वालंकारभूषिता॥

In Public Domain. Digitized by Sarvagya Sharda Peeth