भविष्य पुराण
Bhavishya Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 72, कुल 654 में से
संदर्भ में पढ़ें- ब्राह्मपर्व *
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वह सुख भोगनेवाला और शुष्क नाकवाला दीर्घजीवी होता है। पतली नाकवाला राजा, लम्बी नाकवाला भोगी, छोटी नाकवाला धर्मशील, हाथी, घोड़ा, सिंह या सूर्यकी भाँति तीखी नाकवाला व्यापारमें सफल होता है। कुन्द-पुष्पकी कलीके समान उज्ज्वल दाँतवाला राजा तथा हाथीके समान दाँतवाला एवं चिकने दाँतवाला गुणवान् होता है। भालू और बंदरके समान दाँतवाले नित्य भूखसे व्याकुल रहते हैं। कराल, रूखे, अलग-अलग और फूटे हुए दाँतवाले दुःखसे जीवन व्यतीत करनेवाले होते हैं। बत्तीस दाँतवाले राजा, एकतीस दाँतवाले भोगी, तीस दाँतवाले सुख-दुःख भोगनेवाले तथा उनतीस दाँतवाले पुरुष दुःख ही भोगते हैं। काली या चित्रवर्णकी जीभ होनेपर व्यक्ति दासवृत्तिसे जीवन व्यतीत करता है। रूखी और मोटी जीभवाला क्रोधी, श्वेतवर्णकी जीभवाला पवित्र आचरणसे सम्पन्न होता है। निम्न, स्निग्ध, अग्रभाग रक्तवर्ण और छोटी जिह्वावाला विद्वान् होता है। कमलके पतेके समान पतली, लम्बी न बहुत मोटी और न बहुत चौड़ी जिह्वा रहनेपर राजा होता है। काले रंगका तालुवाला अपने कुलका नाशक, पीले तालुवाला सुख-दुःख भोग करनेवाला, सिंह और हाथीके तालुके समान तथा कमलके समान तालुवाला राजा होता है, श्वेत तालुवाला धनवान् होता है। रूखा, फटा हुआ तथा विकृत तालुवाला मनुष्य अच्छा नहीं माना जाता।
हंसके समान स्वरवाले तथा मेघके समान गम्भीर स्वरवाले पुरुष धन्य माने गये हैं। क्राँचके समान स्वरवाले राजा, महान् धनी तथा विविध सुखोंका भोग करनेवाले होते हैं। चक्रवाकके समान जिनका स्वर होता है ऐसे व्यक्ति धन्य तथा धर्मवत्सल राजा होते हैं। घड़े एवं दुन्दुभिके समान स्वरवाले पुरुष राजा होते हैं। रूखे, ऊँचे, क्रूर,
पशुओंके समान तथा घर्घरयुक्त स्वरवाले पुरुष दुःखभागी होते हैं। नीलकण्ठ पक्षीके समान स्वरवाले भाग्यवान् होते हैं। फूटे काँसेके बर्तनके समान तथा टूटे-फूटे स्वरवाले अधम कहे गये हैं।
दाड़िमके पुष्पके समान नेत्रवाला राजा, व्याघ्रके समान नेत्रवाला क्रोधी, केकड़ेके समान आँखवाला झगड़ालू, बिल्ली और हंसके समान नेत्रवाला पुरुष अधम होता है। मयूर एवं नकुलके समान आँखवाले मध्यम माने जाते हैं। शहदके समान पिङ्गल वर्णके नेत्रवालेको लक्ष्मी कभी भी त्याग नहीं करती। गोरोचन, गुंजा और हरतालके समान पिङ्गल नेत्रवाला बलवान् और धनेश्वर होता है। अर्धचन्द्रके समान ललाट होनेपर राजा होता है। बड़ा ललाट होनेपर धनवान् होता है। छोटा ललाट होनेपर धर्मात्मा होता है। ललाटके बीच जिस स्त्री तथा पुरुषके पाँच आड़ी रेखा होती है वह सौ वर्षोंतक जीवित रहता है और ऐश्वर्य भी प्राप्त करता है। चार रेखा होनेपर अस्सी वर्ष, तीन रेखा होनेपर सत्तर वर्ष, दो रेखा होनेपर साठ वर्ष, एक रेखा होनेपर चालीस वर्ष और एक भी रेखा न होनेपर पचीस वर्षकी आयुवाला होता है। इन रेखाओंके द्वारा हीन, मध्यम और पूर्ण आयुकी परीक्षा करनी चाहिये। छोटी रेखा होनेपर व्याधियुक्त तथा अल्पायु और लम्बी-लम्बी रेखाएँ होनेपर दीर्घायु होता है। जिसके ललाटमें त्रिशूल अथवा पट्टिशका चिह्न होता है, वह बड़ा प्रतापी, कीर्तिसम्पन्न राजा होता है। छत्रके समान सिर होनेपर राजा, लम्बा सिर होनेपर दुःखी, दरिद्र, विषम होनेपर समान तथा गोल सिर होनेपर सुखी, हाथीके समान सिर होनेपर राजाके समान होता है। जिनके केश अथवा रोम मोटे, रूखे, कपिल और आगेसे फटे हुए होते हैं, वे अनेक प्रकारके दुःख भोगते हैं। बहुत गहरे और कठोर केश दुःखदायी होते
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