भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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नक्षत्रों के चरणाक्षर

ऊपर बताया जा चुका है कि प्रत्येक नक्षत्र को ४ चरण तथा ६० अंशों में विभाजित किया गया है। ज्योतिषियों के प्रत्येक नक्षत्र के प्रत्येक चरण का एक-एक 'अक्षर' भी निर्धारित किया है। जिस नक्षत्र के जिस चरण के लिए जो अक्षर निश्चित है, उसका उल्लेख नीचे किया गया है। जो मनुष्य जिस नक्षत्र के जिस चरण के भोग-काल में जन्म लेता है, उसका नाम उसी चरणाक्षर के आधार पर रखा जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म अश्विनी नक्षत्र के तीसरे चरण में हुआ हो तो उसका नाम का आदि अक्षर 'चो' होगा और उसी के आधार पर उसका नाम 'चोवसिंह', 'चोइथराम' आदि रखा जाएगा। किस नक्षत्र के किस चरण के लिए कौनसा अक्षर नियत है, इसे निम्नानुसार समझ लें।

नक्षत्र नामचरणाक्षर: प्रथमचरणाक्षर: द्वितीयचरणाक्षर: तृतीयचरणाक्षर: चतुर्थनक्षत्र नामचरणाक्षर: प्रथमचरणाक्षर: द्वितीयचरणाक्षर: तृतीयचरणाक्षर: चतुर्थ
१. अश्विनीचूचेचोला१५. स्वातिरूरेरोता
२. भरणीलीलूलेलो१६. विशाखातीतूतेतो
३. कृत्तिका१७. अनुराधानानीनूने
४. रोहिणीवावीवू१८. ज्येष्ठानोयायीयू
५. मृगशिरावेवोकाकी१९. मूलयेयोभाभी
६. आर्द्राकु२०. पूर्वाषाढ़ाभूधाफाढा
७. पुनर्वसुकेकोहाही२१. उत्तराषाढ़ाभेभोजाजी
८. पुष्यहूहेहोडा२२. अभिजित्जूजेजोखा
९. अश्लेषाडीडूडेडो२३. श्रवणखीखूखेखो
१०. मघामामीमूमे२४. धनिष्ठागागीगूगे
११. पू. फाल्गुनीमोटाटीटू२५. शतभिषागोसासीसू
१२. उ. फाल्गुनीटेटोपापी२६. पू. भाद्रपदसेसोदादी
१३. हस्तपू२७. उ. भाद्रपददू
१४. चित्रापेपोरारी२८. रेवतीदेदोचाची

वार

भारतीय ज्योतिष के अनुसार आकाश-मण्डल में मुख्य ग्रहों की संख्या ७ है। वे ग्रह हैं—(१) शनि, (२) बृहस्पति, (३) मंगल, (४) रवि, (५) शुक्र, (६) बुध और (७) चन्द्रमा। इन ग्रहों की अवस्थिति क्रमशः एक दूसरे से नीचे है। अर्थात् शनि की कक्षा सबसे ऊपर तथा चन्द्रमा की कक्षा सबसे नीचे है। एक दिन-रात २४ घंटे का होता है। ज्योतिष में एक घंटे के समय के लिए 'होरा' शब्द प्रचलित है। यह 'होरा' शब्द 'अहोरात्र' शब्द का संक्षिप्त रूप है अर्थात्