भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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नक्षत्रों के चरणाक्षर
ऊपर बताया जा चुका है कि प्रत्येक नक्षत्र को ४ चरण तथा ६० अंशों में विभाजित किया गया है। ज्योतिषियों के प्रत्येक नक्षत्र के प्रत्येक चरण का एक-एक 'अक्षर' भी निर्धारित किया है। जिस नक्षत्र के जिस चरण के लिए जो अक्षर निश्चित है, उसका उल्लेख नीचे किया गया है। जो मनुष्य जिस नक्षत्र के जिस चरण के भोग-काल में जन्म लेता है, उसका नाम उसी चरणाक्षर के आधार पर रखा जाता है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का जन्म अश्विनी नक्षत्र के तीसरे चरण में हुआ हो तो उसका नाम का आदि अक्षर 'चो' होगा और उसी के आधार पर उसका नाम 'चोवसिंह', 'चोइथराम' आदि रखा जाएगा। किस नक्षत्र के किस चरण के लिए कौनसा अक्षर नियत है, इसे निम्नानुसार समझ लें।
| नक्षत्र नाम | चरणाक्षर: प्रथम | चरणाक्षर: द्वितीय | चरणाक्षर: तृतीय | चरणाक्षर: चतुर्थ | नक्षत्र नाम | चरणाक्षर: प्रथम | चरणाक्षर: द्वितीय | चरणाक्षर: तृतीय | चरणाक्षर: चतुर्थ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| १. अश्विनी | चू | चे | चो | ला | १५. स्वाति | रू | रे | रो | ता |
| २. भरणी | ली | लू | ले | लो | १६. विशाखा | ती | तू | ते | तो |
| ३. कृत्तिका | आ | ई | उ | ए | १७. अनुराधा | ना | नी | नू | ने |
| ४. रोहिणी | ओ | वा | वी | वू | १८. ज्येष्ठा | नो | या | यी | यू |
| ५. मृगशिरा | वे | वो | का | की | १९. मूल | ये | यो | भा | भी |
| ६. आर्द्रा | कु | घ | ङ | छ | २०. पूर्वाषाढ़ा | भू | धा | फा | ढा |
| ७. पुनर्वसु | के | को | हा | ही | २१. उत्तराषाढ़ा | भे | भो | जा | जी |
| ८. पुष्य | हू | हे | हो | डा | २२. अभिजित् | जू | जे | जो | खा |
| ९. अश्लेषा | डी | डू | डे | डो | २३. श्रवण | खी | खू | खे | खो |
| १०. मघा | मा | मी | मू | मे | २४. धनिष्ठा | गा | गी | गू | गे |
| ११. पू. फाल्गुनी | मो | टा | टी | टू | २५. शतभिषा | गो | सा | सी | सू |
| १२. उ. फाल्गुनी | टे | टो | पा | पी | २६. पू. भाद्रपद | से | सो | दा | दी |
| १३. हस्त | पू | ष | ण | ठ | २७. उ. भाद्रपद | दू | थ | झ | ञ |
| १४. चित्रा | पे | पो | रा | री | २८. रेवती | दे | दो | चा | ची |
वार
भारतीय ज्योतिष के अनुसार आकाश-मण्डल में मुख्य ग्रहों की संख्या ७ है। वे ग्रह हैं—(१) शनि, (२) बृहस्पति, (३) मंगल, (४) रवि, (५) शुक्र, (६) बुध और (७) चन्द्रमा। इन ग्रहों की अवस्थिति क्रमशः एक दूसरे से नीचे है। अर्थात् शनि की कक्षा सबसे ऊपर तथा चन्द्रमा की कक्षा सबसे नीचे है। एक दिन-रात २४ घंटे का होता है। ज्योतिष में एक घंटे के समय के लिए 'होरा' शब्द प्रचलित है। यह 'होरा' शब्द 'अहोरात्र' शब्द का संक्षिप्त रूप है अर्थात्