भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
पृष्ठ 222, कुल 638 में से
संदर्भ में पढ़ें'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कर्क लग्न : अष्टमभाव : बुध आठवें भाव में शनि की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक की आयु तथा पुरातत्त्व का कुछ कमियों के साथ लाभ होता है। भाई-बहिन के सुख तथा पराक्रम में कुछ कमी आती है। बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से खर्च चलता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से द्वितीयभाव को देखने से धन का लाभ होता है, परन्तु सुख के व्ययेश होने के कारण खर्च अधिक बना रहता है। 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कर्क लग्न : नवमभाव : गुरु नवें भाव में मित्र गुरु की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक की धर्म तथा भाग्योन्नति के क्षेत्र में कुछ त्रुटिपूर्ण सफलता मिलती है। बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से सामान्य लाभ होता है। खर्च अधिक रहता है। सातवीं उच्च दृष्टि से तृतीयभाव को देखने के कारण पुरुषार्थ की वृद्धि होती है, परन्तु भाग्यो- न्नति में बाधाएं भी आती रहती हैं। 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश कर्क लग्न : दशमभाव : बुध दसवें भाव में मित्र मंगल की राशि पर स्थित बुध के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में त्रुटिपूर्ण सफलताएँ मिलती हैं, परन्तु भाई-बहिन के सुख तथा पराक्रम की वृद्धि होती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से चतुर्थभाव को देखने के कारण माता, भूमि एवं भवन आदि का सामान्य लाभ होता है तथा परिश्रम द्वारा खर्च चलता है।