भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४६ 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश कर्क लग्न : अष्टमभाव : राहु सातवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की आयु के बारे में कभी-कभी चिन्ताजनक स्थितियों का मुकाबला करना पड़ता है तथा पुरातत्त्व की हानि भी होती है। वह उदर-विकार से ग्रस्त रहता है। जीवन- निर्वाह के लिए उसे अनेक गुप्त युक्तियों का आश्रय लेना पड़ता है। 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश कर्क लग्न : नवमभाव : राहु नवें भाव में शत्रु गुरु की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक की भाग्योन्नति में कठि- नाइयां आती हैं तथा धर्म का भी यथावत् पालन नहीं हो पाता। उसे कभी-कभी बड़े संकटों का सामना भी करना पड़ता है, परन्तु गुप्त युक्तियों तथा परिश्रम के बल पर कुछ सफलता भी प्राप्त करता है। 'कर्क' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'राहु' का फलादेश कर्क लग्न : दशमभाव : राहु दसवें भाव में शत्रु मंगल की राशि पर स्थित राहु के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में परेशानियां उठानी पड़ती हैं। अनेक कष्टों को भोगने तथा अनेक बार निराश होने के बाद वह अपने परिश्रम, धैर्य तथा बहादुरी से थोड़ी बहुत उन्नति करता तथा प्रतिष्ठा भी बचाता है।