भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२६६ 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश सिंह लग्न : एकादशभाव : चन्द्र ग्यारहवें भाव में मित्र बुध की राशि पर स्थित चन्द्रमा के प्रभाव से जातक को बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता है, परन्तु खर्च भी अधिक बना रहता है। सातवीं मित्रदृष्टि से पंचमभाव को देखने के कारण विद्या, बुद्धि तथा सन्तान के पक्ष में भी कुछ कमी रहती है। बाहरी तौर पर ऐसा जातक धनी समझा जाता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'चन्द्रमा' का फलादेश सिंह लग्न : द्वादशभाव : चन्द्र बारहवें भाव में स्वराशि में स्थित व्ययेश चन्द्रमा के प्रभाव से जातक का खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से यश, सुख तथा लाभ की प्राप्ति होती है। सातवीं शत्रुदृष्टि से षष्ठभाव को देखने के कारण जातक अपने मनोबल तथा खर्च के बल पर शत्रु-पक्ष पर विजय पाता तथा प्रभाव स्थापित करता है, परन्तु झगड़े-मुकदमे आदि में खर्च बहुत होता है। 'सिंह' लग्न में 'मंगल' 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'प्रथमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश सिंह लग्न : प्रथमभाव : मंगल पहले भाव में मित्र सूर्य की राशि पर स्थित मंगल के प्रभाव से जातक का व्यक्तित्व प्रभावशाली होता है। वह भाग्यवान्, धर्मात्मा तथा ईश्वर-भक्त भी होता है। चौथी दृष्टि से स्वराशि के चतुर्थभाव को देखने के कारण माता, भूमि तथा भवन का सुख मिलता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से सप्तमभाव को देखने से स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में परेशानियां आती हैं। आठवीं मित्रदृष्टि से अष्टमभाव को देखने से आयु तथा पुरातत्त्व का लाभ प्राप्त होता है।