भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

पृष्ठ 272, कुल 638 में से

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२८० 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'पंचमभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश सिंह लग्न : पंचमभाव : शुक्र पाँचवें भाव में शत्रु गुरु की राशि पर स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक को विद्या, बुद्धि एवं संतान के क्षेत्र में सफलता मिलती है। भाई-बहिन एवं पिता का सुख भी प्राप्त होता है। वह अपनी योग्यता एवं चातुर्य के बल पर सर्वत्र सम्मानित भी होता है। सातवीं मित्रदृष्टि से एकादशभाव को देखने से परिश्रम द्वारा पर्याप्त लाभ होता है तथा राज्य- पक्ष में भी सम्मान, सुख एवं लाभ मिलता है। ऐसा व्यक्ति राजनीतिज्ञ, सुखी, धनी, यशस्वी तथा चतुर होता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'षष्ठभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश सिंह लग्न : षष्ठभाव : शुक्र छठे भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक बड़ा चतुर, प्रभावशाली तथा शत्रुओं पर विजय पाने वाला होता है। पिता के साथ सामान्य मतभेद रहता है, परन्तु राज्य-पक्ष में उन्नति एवं सफलता मिलती है। सातवीं शत्रुदृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है, परन्तु बाहरी सम्बन्धों से सुख और लाभ की प्राप्ति होती है। ऐसा व्यक्ति गुप्त युक्तियों के बल पर सफलताएँ प्राप्त करता है। 'सिंह' लग्न की कुण्डली के 'सप्तमभाव' स्थित 'शुक्र' का फलादेश सिंह लग्न : सप्तमभाव : शुक्र सातवें भाव में मित्र शनि की राशि पर स्थित शुक्र के प्रभाव से जातक को स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में विशेष सफलता मिलती है तथा भाई- बहिन एवं पिता का सुख भी मिलता है। यह कुशलतापूर्वक गृहस्थी का संचालन करता है तथा यश प्राप्त करता है। सातवीं शत्रुदृष्टि से प्रथमभाव को देखने से जातक को शारीरिक शक्ति, प्रभाव, मनोबल तथा हिम्मत वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति बहादुर तथा हुकूमत करने वाला होता है।

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