भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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३२५ 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'तृतीयभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश कन्यालग्न : तृतीयभाव : शनि तीसरे भाव में शत्रु मंगल' की राशि पर स्थित 'शुक्र' के प्रभाव से जातक को भाई-बहिनों से परेशानी रहती है, पर शत्रु-पक्ष पर विजय मिलती है और पराक्रम की वृद्धि होती है। तीसरी दृष्टि से स्वराशि के पंचमभाव को देखने से विद्या-बुद्धि का लाभ होता है, परन्तु सन्तान-पक्ष में सामान्य कठिनाइयां आती हैं। सातवीं मित्रदृष्टि से नवमभाव को देखने से परिश्रम द्वारा भाग्योन्नति होती है। दसवीं शत्रुदृष्टि से द्वादशभाव की देखने से खर्च में कठिनाई का अनुभव होता है तथा बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से असन्तोष रहता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'चतुर्थभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश कन्या लग्न : चतुर्थभाव : शनि चौथे भाव में शत्रु 'गुरु' की राशि पर स्थित 'शनि' के प्रभाव से जातक को माता, भूमि तथा भवन के सुख में कमी रहती है तथा सन्तान के पक्ष से भी परेशानी रहती है, परन्तु विद्या-बुद्धि का लाभ होता है। तीसरी दृष्टि से स्वराशि में षष्ठभाव की देखने से शत्रु-पक्ष पर विजय मिलती है तथा झगड़ों से सुख-दुःख दोनों ही मिलते हैं। सातवीं मित्रदृष्टि से दशमभाव को देखने से पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में परिश्रम द्वारा सफलता मिलती है। दसवीं मित्रदृष्टि से प्रथमभाव की देखने से परिश्रम एवं प्रभाव की वृद्धि होती है, परन्तु शरीर कुछ अस्वस्थ बना रहता है। 'कन्या' लग्न की कुण्डली में 'पंचमभाव' स्थित 'शनि' का फलादेश कन्या लग्न : पंचमभाव : शनि पाँचवें भाव में स्वराशि-स्थित 'शनि' के प्रभाव से जातक की कुछ कठिनाइयों के साथ विद्या-बुद्धि एवं सन्तान का लाभ होता है, परन्तु सन्तान से कुछ परेशानी भी होती है। शत्रु-पक्ष में उसे गुप्त युक्तियों से विजय मिलती है। तीसरी शत्रुदृष्टि से सप्तमभाव की देखने से स्त्री-पक्ष से कुछ परेशानी रहती है तथा व्यवसाय में भी कठिनाइयाँ आती हैं। सातवीं शत्रु-दृष्टि से एकादशभाव की देखने से परिश्रम द्वारा लाभ होता है। दसवीं उच्च दृष्टि से द्वितीय भाव की देखने से धन- कुटुम्ब की वृद्धि होती है। ऐसा व्यक्ति संघर्षपूर्ण सुखी-सम्पन्न जीवन बिताता है।