भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें३५६ 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'षष्ठभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश तुला लग्न : षष्ठभाव : बुध छठे भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित नीच के 'बुध' के प्रभाव से जातक को शत्रु-पक्ष में कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं तथा खर्च भी कठिनाई से चलता है। धर्म एवं भाग्य के क्षेत्र में भी कमजोरी रहती है परन्तु बाहरी स्थानों के सम्बन्ध से लाभ होता है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि में द्वादशभाव को देखने से खर्च की अधिकता बनी रहती है। 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'सप्तमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश तुला लग्न : सप्तमभाव : बुध सातवें भाव में मित्र 'मंगल' की राशि पर स्थित व्ययेश 'बुध' के प्रभाव से जातक को स्त्री तथा व्यवसाय के पक्ष में कुछ कठिनाइयों के साथ सफलता मिलती है। गृहस्थी का खर्च अच्छी तरह चलता है तथा धर्म का पालन भी होता है। बाहरी स्थानों से लाभ मिलता है। सातवीं मित्रदृष्टि से प्रथमभाव को देखने से शारीरिक सुख तथा मान-प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। ऐसा व्यक्ति भाग्यवान् समझा जाता है। 'तुला' लग्न की कुण्डली में 'अष्टमभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश तुला लग्न : अष्टमभाव : बुध आठवें भाव में मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक की आयु तथा पुरातत्त्व की शक्ति प्राप्त होती है परन्तु भाग्य तथा धर्म के क्षेत्र में कमजोरी रहती है। बाहरी संबंधों से कठिनाइयों के साथ लाभ होता है तथा खर्च चलाने में भी परेशानियां आती हैं। सातवीं मित्रदृष्टि से द्वितीयभाव को देखने से कठिनाइयों के साथ धन की वृद्धि होती है, परन्तु यश कम ही मिलता है।