भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

DevanagariHindipublished638 पृष्ठ

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४३८ 'धनु' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश धनुलग्न : अष्टमभाव : मंगल आठवें भाव में मित्र 'चन्द्रमा' की राशि पर स्थित नीच के 'मंगल' के प्रभाव से जातक की आयु तथा पुरातत्त्व शक्ति में कमी आती है। पेट में विकार तथा मस्तिष्क में चिन्ताएं रहती हैं। संतान पक्ष से कष्ट होता है तथा विद्या-पक्ष में कमजोरी रहती है। चौथी शत्रु-दृष्टि से एकादश भाव को देखने से कठिन परिश्रम द्वारा आमदनी में वृद्धि होती है। सातवीं उच्च-दृष्टि से द्वितीय भाव को देखने से धन- कुटुम्ब का सामान्य सुख मिलता है। आठवीं शत्रु- दृष्टि से तृतीय भाव को देखने से पराक्रम की वृद्धि होती है, परन्तु भाई-बहिनों से विरोध रहता है। 'धनु' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश धनुलग्न : नवमभाव : मंगल नवें भाव में मित्र 'सूर्य' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म की उन्नति होती है। विद्या तथा सन्तान के क्षेत्र में भी कुछ कमी के साथ सफलता मिलती है। चौथी दृष्टि से स्वराशि में द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी संबन्धों से खर्च चलता है। सातवीं शत्रु-दृष्टि से तृतीय भाव को देखने से भाई-बहिनों से विरोध रहता है तथा पराक्रम में कमी आती है। आठवीं मित्र-दृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि तथा भवन का सुख कुछ कमी के भाव मिलता है। 'धनु' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश धनुलग्न : दशमभाव : मंगल दसवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक की राज्य के क्षेत्र में बुद्धियोग से सफलता मिलती है तथा पिता एवं व्यवसाय के क्षेत्र में हानि रहती है। चौथी मित्र-दृष्टि से प्रथम भाव को देखने के शारीरिक सौन्दर्य एवं स्वास्थ्य में कमी रहती है। सातवीं मित्र-दृष्टि से चतुर्थभाव को देखने से माता, भूमि एवं भवन का सुख कुछ कमी के साथ मिलता है। आठवीं दृष्टि से स्वराशि में पंचम भाव को देखने से विद्या, बुद्धि का श्रेष्ठ लाभ होता है, परन्तु सन्तान-पक्ष फिर भी कमजोर रहता है।