भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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४८ 'बुध' की विभिन्न भावों पर दृष्टि

[कुण्डली चित्र विवरण:]

  • १ भाव (लग्न): बुध
  • ३ भाव: एकपाद
  • ४ भाव: त्रिपाद
  • ५ भाव: द्विपाद
  • ७ भाव: पूर्ण
  • ८ भाव: त्रिपाद
  • ९ भाव: द्विपाद
  • १० भाव: एकपाद

**टिप्पणी—**जिस भाव में भी 'बुध' बैठा हो, उस भाव से उपर्युक्त आधार पर, उसकी खण्ड तथा पूर्ण दृष्टि के विषय में समझ लेना चाहिए।

'गुरु' की विभिन्न भावों पर दृष्टि

[कुण्डली चित्र विवरण:]

  • १ भाव (लग्न): गुरु
  • ३ भाव: एकपाद
  • ४ भाव: त्रिपाद
  • ५ भाव: द्विपाद, पूर्ण
  • ७ भाव: पूर्ण
  • ८ भाव: त्रिपाद
  • ९ भाव: द्विपाद, पूर्ण
  • १० भाव: एकपाद

**टिप्पणी—**जिस भाव में भी 'गुरु' बैठा हो, उस भाव से उपर्युक्त आधार पर उसका खण्ड तथा पूर्ण दृष्टि के विषय में समझ लेना चाहिए।