भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
DevanagariHindipublished638 पृष्ठ
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४८ 'बुध' की विभिन्न भावों पर दृष्टि
[कुण्डली चित्र विवरण:]
- १ भाव (लग्न): बुध
- ३ भाव: एकपाद
- ४ भाव: त्रिपाद
- ५ भाव: द्विपाद
- ७ भाव: पूर्ण
- ८ भाव: त्रिपाद
- ९ भाव: द्विपाद
- १० भाव: एकपाद
**टिप्पणी—**जिस भाव में भी 'बुध' बैठा हो, उस भाव से उपर्युक्त आधार पर, उसकी खण्ड तथा पूर्ण दृष्टि के विषय में समझ लेना चाहिए।
'गुरु' की विभिन्न भावों पर दृष्टि
[कुण्डली चित्र विवरण:]
- १ भाव (लग्न): गुरु
- ३ भाव: एकपाद
- ४ भाव: त्रिपाद
- ५ भाव: द्विपाद, पूर्ण
- ७ भाव: पूर्ण
- ८ भाव: त्रिपाद
- ९ भाव: द्विपाद, पूर्ण
- १० भाव: एकपाद
**टिप्पणी—**जिस भाव में भी 'गुरु' बैठा हो, उस भाव से उपर्युक्त आधार पर उसका खण्ड तथा पूर्ण दृष्टि के विषय में समझ लेना चाहिए।