भारतकोश
भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)

Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary

महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा

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५२२ 'कुम्भ' लग्न की कुण्डली के 'अष्टमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश कुम्भ लग्न : अष्टमभाव : मंगल आठवें भाव में मित्र 'बुध' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक को आयु तथा पुरातत्त्व की शक्ति का लाभ होता है। पिता, राज्य एवं व्यवसाय के क्षेत्र में कठिनाइयाँ आती हैं। भाई- बहिन के सुख तथा पराक्रम में भी कमी आती है। चौथी मित्रदृष्टि से एकादश भाव को देखने से आमदनी अच्छी रहती है। सातवीं मित्रदृष्टि से द्वितीय भाव को देखने से धन-कुटुम्ब का सुख प्राप्त होता है। आठवीं दृष्टि से स्वराशि में तृतीय भाव को देखने से पराक्रम की वृद्धि होती है तथा भाई-बहिनों का सुख प्राप्त होता है। 'कुम्भ' लग्न की कुण्डली के 'नवमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश कुम्भ लग्न : नवमभाव : मंगल नवें भाव में सामान्य मित्र 'शुक्र' की राशि पर स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक के भाग्य तथा धर्म की विशेष उन्नति होती है और उसे पिता, राज्य तथा व्यवसाय से भी सुख प्राप्त होता है। चौथी उच्चदृष्टि से द्वादशभाव को देखने से खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी सम्बन्धों से लाभ मिलता है। सातवीं दृष्टि से स्वराशि में तृतीय भाव को देखने से पराक्रम की वृद्धि होती है तथा भाई-बहिनों का सुख मिलता है। आठवीं सामान्य मित्रदृष्टि से चतुर्थभाव को देखने के कारण माता, भूमि तथा भवन का श्रेष्ठ सुख प्राप्त होता है। 'कुम्भ' लग्न की कुण्डली के 'दशमभाव' स्थित 'मंगल' का फलादेश कुम्भ लग्न : दशमभाव : मंगल दसवें भाव में स्वराशि-स्थित 'मंगल' के प्रभाव से जातक को पिता, राज्य तथा व्यवसाय के क्षेत्र में सहयोग, सम्मान तथा सफलता प्राप्त होती है। पराक्रम में वृद्धि होती है तथा भाई-बहिनों का सुख भी मिलता है। चौथी शत्रुदृष्टि से प्रथम भाव को देखने से शारीरिक सौन्दर्य में कमी आती है, परन्तु मान-प्रतिष्ठा एवं प्रभाव में वृद्धि होती है। सातवीं सामान्य मित्रदृष्टि से चतुर्थ भाव को देखने से माता के सुख में सामान्य कमी रहती है तथा भूमि, भवन का सुख प्राप्त होता है। आठवीं मित्रदृष्टि से पंचम भाव को देखने से विद्या-बुद्धि एवं सन्तान-पक्ष की वृद्धि होती है।