भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें५७० 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'एकादशभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मीनलग्न : एकादशभाव : बुध ग्यारहवें भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक की आमदनी में अत्यधिक वृद्धि होती है। माता, भूमि, भवन, स्त्री तथा व्यवसाय के क्षेत्र में भी सफलताएँ मिलती हैं। सातवीं मित्र-दृष्टि से पंचम भाव को देखने से विद्या-बुद्धि एवं सन्तान-पक्ष को विशेष उन्नति होती है। ऐसा व्यक्ति बुद्धिमान्, मधुर-भाषी, धनी, सुखी तथा यशस्वी होता है। 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'द्वादशभाव' स्थित 'बुध' का फलादेश मीनलग्न : द्वादशभाव : बुध बारहवें भाव में मित्र 'शनि' की राशि पर स्थित 'बुध' के प्रभाव से जातक का खर्च अधिक रहता है तथा बाहरी सम्बन्धों से लाभ होता है। माता, भूमि, भवन, घरेलू सुख, स्त्री तथा दैनिक व्यवसाय के क्षेत्र में परे- शानियों का सामना करना पड़ता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से षष्ठभाव को देखने से शत्रु- पक्ष पर विजय प्राप्त होती है। ऐसा व्यक्ति धैर्यवान् तथा हिम्मत वाला होता है। 'मीन' लग्न में 'गुरु' 'मीन' लग्न की कुण्डली के 'प्रथमभाव' स्थित 'गुरु' का फलादेश मीनलग्न : प्रथमभाव : गुरु पहले भाव में स्वराशि स्थित 'गुरु' के प्रभाव से जातक के शारीरिक सौन्दर्य तथा प्रभाव में वृद्धि होती है। उसे पिता, राज्य तथा व्यवसाय के पक्ष में भी सफलताएँ मिलती हैं। वह बड़ा धनी तथा व्यवसायी होता है। पांचवीं उच्च दृष्टि से पंचम भाव को देखने से विद्या-बुद्धि तथा सन्तान का यथेष्ट लाभ होता है। सातवीं मित्र-दृष्टि से सप्तम भाव को देखने से स्त्री सुन्दर मिलती है तथा दैनिक व्यवसाय की वृद्धि होती है। नवीं मित्र-दृष्टि से नवम भाव को देखने से भाग्य तथा धर्म की विशेष उन्नति होती है।