भृगु संहिता (महर्षि भृगु - फलित सर्वाङ्ग दर्शन, कुण्डली-फल एवं कर्मविपाक सटीक)
Bhrigu Samhita Phalita Sarvanga Darshana with Commentary
महर्षि भृगु (सम्पादक: पं. नन्दलाल शास्त्री / खेमराज श्रीकृष्णदास) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६२१ चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र, शनि (२०) चन्द्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक धनी, सुखी, अत्यन्त गुणवान्, विद्वान्, यशस्वी, गणाधीश, लोकपूजित तथा राजा का मंत्री होता है। १५३४ मंगल, बुध गुरु, शुक्र, शनि (२१) मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की युति हो तो जातक चंचल, आलसी, धनी, सुखी, लोकप्रिय, पवित्र वक्ता, दीर्घायु, अधिक सोने वाला तथा तामसी स्वभाव का होता है। १५३५ छः ग्रहों की युति का फलादेश सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र (१) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शुक्र की युति हो तो जातक यशस्वी, भाग्यवान्, भोगी, धन- धान्य तथा विद्या से युक्त, धर्मात्मा, अल्पभाषी तथा सुखी जीवन बिताने वाला होता है। १५३६ सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शनि (२) सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु और शनि की युति हो तो जातक दयालु, परोपकारी, मंगल चिह्न शुद्ध अन्तःकरण वाला, विवाद में विजय पानेवाला तथा वनों में विचरण करनेवाला होता है। १५३७