भारतकोश
बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

बीसलदेव रासो (नरपति नाल्ह - अजमेर के चौहान विग्रहराज चतुर्थ का ऐतिहासिक काव्य)

Bisaldev Raso of Narapati Nalha on Ajmer Chauhans

नरपति नाल्ह द्वारा

DevanagariHindipublished315 पृष्ठ

पृष्ठ 146, कुल 315 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 146

~ ४० ~ तिण^१ दिन^२ राजा^३ थे गम परठ । तउ अगलउ^४ राउ^५ पूरइ थारी आस^६ ॥ ५१ ॥ झूठउ^७ रे बमण^८ कहिउं^९ रे विचार । किम रे दिन नहीं माय विचारि^१० ॥ झाझचि कागउरे जोइसी । म्हे तउ मामा^११ छाडिया गढ़ अजमेर ॥ फाका^१२ घरंउशा^१३ ना रहा । डहग घालिया निडचइ आव^१४ ॥ ५२ ॥

१+२+३. अ० २, आ० ६ जीए दिन सामी । ४. अ० २ ज्युघणी आगइ, आ० ६ आगइ, आ० १२ आगिला । ५. आ० ६ तुमारी । ६. अ० २ पूरइ हो आस, आ० ६ पूरै जिम आस आ० ६ तुझ पूरइ आस, आ० १२ तुम्ह पूरयै आस । यह छन्द अ० २ खण्ड २ में २६, आ० ६ खण्ड २ में २४, आ० ६ में ५५ तथा आ० १२ में ४८ है। इस छन्द की चौथी पंक्ति अ० २ में है— “बाचइ पतढउ बोलइ छुइ सांच ।” तथा आ० ६ में है — “बाच्यो पक्तढ बोलियो साच ।” इसी प्रकार तीसरी पंक्ति अ० २ में है— “मास एक लगि राखा दिन नहीं ।” आ० १२ में यह नयां पंक्ति है— “योगिनी का समझ नहीं ।” आ० १२ में १० वीं पंक्ति पुष्य नक्षत्र अ कातिक मास । ७. आ० ६ झूठारे । ८. आ० १२ बाभण । ९. आ० १२ कह्यो । १०. आ० ६ च्यारि । ११. आ० ६ भाई । १२. आ० १२ थांके । १३. आ० १२ घरण्ये । १४. आ० १२ आसवेर । यह छंद आ० ६ में ५६, आ० १२ में ४६ है । आ० १२ में दूसरी पंक्ति है —किम दिन नाहीय मात विचारि। तथा चौथी पंक्ति है— म्हेतो छाडिया जोइसी गड़ अजमेर ।